शक्तिनगर। एनसीएल की खड़िया कोयला खदान के विस्तार से पहले क्षेत्र और पुनर्वास गांवों में बढ़ते प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण की मांग तेज हो गई है। इस संबंध में ऊर्जाांचल विस्थापित कल्याण समिति की साप्ताहिक बैठक में ग्रामीणों की समस्याओं और खदान विस्तार से जुड़े पर्यावरणीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए समिति के अध्यक्ष हेमंत मिश्रा ने कहा कि विगत दिनों एनसीएल की खड़िया परियोजना के कोयला खदान विस्तार को लेकर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के माध्यम से पर्यावरणीय लोक सुनवाई आयोजित की गई थी। इसमें स्थानीय विस्थापित परिवारों के सदस्यों की ओर से उठाई गई समस्याओं और प्रस्तुत तथ्यों की अपेक्षित अनदेखी किए जाने की शिकायत सामने आई है। उन्होंने कहा कि चिल्काडांड सहित अन्य पुनर्वास गांवों में प्रदूषण का स्तर निर्धारित मानकों से अधिक होने की शिकायतें मिल रही हैं। वहीं, कोयला और राख के परिवहन के दौरान उड़ने वाली धूल से स्थानीय ग्रामीणों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सड़कों पर उड़ती धूल और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते प्रदूषण से आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। समिति ने मांग की कि एनसीएल प्रबंधन खदान विस्तार से पहले पुनर्वास गांवों में प्रदूषण की वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच कराए। साथ ही प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस एवं प्रभावी इंतजाम किए जाएं और विस्थापित परिवारों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए। हेमंत मिश्रा ने कहा कि स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों का समाधान किए बिना खदान विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई तो इसका विरोध किया जाएगा। इस दौरान जंग बहादुर चौबे, राम लल्लू नेता, रामकरण चौबे, चिंतामणि जायसवाल, बृज बिहारी यादव, शैलेंद्र चौबे, योगेंद्र पटेल, नंदलाल भारती, शालिग्राम और पंकज कुमार उपस्थित रहे।