सुदूर गांवों में क्लीनिक खोलकर बिना किसी डिग्री के ही मरीजों का उपचार करने वाले झोलाछाप की लापरवाही फिर एक जान पर भारी पड़ गई। समुचित उपचार के अभाव में मासूम की मौत हो गई। वह निमोनिया से ग्रसित था।
दुद्धी क्षेत्र के ग्राम पिपरडीह निवासी अयोध्या गोंड की पत्नी को दो माह पूर्व बेटा पैदा हुआ था। एक सप्ताह पहले बच्चे को सर्दी खांसी हुई। परिजन मौसम में बदलाव का असर मानते हुए गांव में ही एक झोलाछाप से उपचार कराने लगे। बीमारी ठीक होने के बजाय बढ़ती गई। मंगलवार को बच्चे को सांस लेने में दिक्कत महसूस हुई तो हालत गंभीर देख परिजन उसे सीएचसी दुद्धी ले आए।
यहां तैनात बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण ने बच्चे की हालत देख उसे तत्काल जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी। परिजन जिला अस्पताल ले जाते इससे पहले ही मासूम की मौत हो गई। डॉ. प्रवीण ने बताया कि बच्चे की हालत बेहद नाजुक थी। समय से समुचित उपचार न मिलने से ऐसा हुआ था। उधर, घटना के बाद मासूम के परिजन झोलाझाप पर सही उपचार न करने का आरोप लगा रहे थे। हालांकि देर शाम तक इस मामले में कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई थी।