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स्कैन कागजात से कोयले की चोरी कर रहे तस्कर

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सोनभद्र। गिट्टी और बालू की तरह ही कोयला चोर गिरोह भी स्कैन परमिट का इस्तेमाल कर तस्करी कर रहे हैं। तस्कर या तो स्कैन कागजात का इस्तेमाल करते हैं या फिर कागजात को 24 घंटे तक वैध होने के नियम का फायद उठाते हुए पुलिस और अफसरों की मिलीभगत से लगातार दो से तीन चक्कर लगा लेते हैं। नीलामी और कोल डिपो का भी कागजात लगाकर एक साथ कई ट्रकों को निकाला जाता है। ओवरलोड तो आम बात है। सूत्रों की माने तो शक्तिनगर के पुलिसकर्मी कोयला चोर गिरोह का भरपूर साथ देती है।
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कोयला चोर गिरोह स्कैन कागजात तो तैयार करते ही हैं साथ ही तीन ट्रकों का माल दो ट्रकों पर लादकर एक ट्रक का कागजात बचा लेते हैं। इसी तरह चोरी के कोयले को किसी सुरक्षित जगह पर इकट्ठा कर डिपो और नीलामी के कागजात से ट्रांजिट रसीद कटवा लेते हैं। चूंकि कोयला ढुलाई की बहुत जांच नहीं होती और इनके अंडरलोड का मानक भी बालू, गिट्टी के मानक से कम होता है। इस कारण कोयले के ओवरलोड पर भी जल्दी किसी का ध्यान नहीं जाता। सूत्रों की माने तो सत्ता पक्ष के अलावा अन्य दलों के कुछ लोग भी इस रैकेट में शामिल हैं। वहीं, एसपी आरपी सिंह कहते हैं कि कोयला की तस्करी में कौन कौन लोग शामिल हैं। वह इसकी जांच कराएंगे।
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