फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ज्यादातर मामलों में केस दर्ज करने तक सिमटी भूमिका

विज्ञापन
विज्ञापन
सोनभद्र। जिले में महिला थाने की स्थापना जिस मकसद से की गई है, वह पूरा नहीं हो पा रहा है। मामलों का निपटारा करने के बजाए पुलिस की भूमिका भूमिका केस दर्ज करने तक सीमित रह गई है। वर्ष 2018 में महिला थाना समेत जिले के अन्य थानों में दहेज उत्पीड़न के करीब 42 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें से महज 11 मामलों का निस्तारण हुआ है। आठ की विवेचना और शेष मामलों में सुलह-समझौते की प्रक्रिया चल रही है। बता दें कि महिला थाना राबर्ट्सगंज में एक थानाध्यक्ष, एक सब इंस्पेक्टर, एक दिवान, एक चालक और 14 महिला कांस्टेबल का पद स्वीकृत है। लेकिन इसके सापेक्ष महज एसओ, चालक और छह सिपाही ही तैनात है। इनमें से एक महिला कांस्टेबल की ड्यूटी कचहरी की सुरक्षा और एक सिपाही की ज्ञानवापी लगी है। सोमवार को थानाध्यक्ष पूजा कौर भी लंबी छूट्टी पर चली गई। पुलिस महकमे से मिली जानकारी के अनुसार एक जनवरी 2018 से 30 नवंबर 2018 तक महिला थाने में 16 दहेज उत्पीडन के मुकदमे दर्ज है। इनमें से अब तक आठ मामलों का निस्तारण हो चुका है। शेष में विवेचना प्रचलित है। वहीं जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में 26 दहेज उत्पीडन के मुकदमे दर्ज है। इन मामलों को परिवार न्यायालय में भेजा गया है। अब तक सुलह-समझौते के माध्यम से तीन का निस्तारण किया जा चुका है। शेष प्रकरणों को सुलह-समझौते से हल करने का प्रयास जारी है। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक किरीट राठोड ने कहा कि जल्द ही महिला थाने में नए इंचार्ज की तैनाती कर दी जाएगी। निष्पक्ष ढंग से विवेचना करवा कर पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाया जा रहा है। कहा कि महिला उत्पीड़न पर रोक लगाने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें