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बलात्कार के दोषी चाचा-भतीजा को आठ-आठ साल की कैद

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सोनभद्र। अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी संतराम की अदालत ने गुरुवार को नाबालिग बालिका के साथ बलात्कार के मामले में दोष सिद्ध पाकर चाचा-भतीजा को आठ-आठ साल का सश्रम कारावास एवं 17-17 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
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एडीजीसी क्रिमिनल कुंवर वीर प्रताप सिंह के मुताबिक कोतवाली के एक गांव निवासी व्यक्ति ने 16 फरवरी 2011 को दी गई तहरीर में आरोप लगाया था कि 14 फरवरी 2011 को सायं सात बजे उसकी तेरह वर्षीय नाबालिग बेटी शौच के लिए गई थी। लेकिन वह वापस नहीं लौटी। खोजबीन पर भी उसका पता नहीं चला। छोटई, उसके भाई रामकरन एवं उसका भतीजा राजेश ने हैंडपंप रिबोर होने को लेकर हुए विवाद के दौरान यह धमकी दी थी कि तुम्हारी बेटी को उठा ले जाएंगे। इसी बीच बेटी लापता हो गई। शक होने पर जब छोटई से बेटी के लापता होने के बारे में पूछा तो गाली देने लगा। कहा कि तुम्हारी बेटी कभी वापस नहीं आएगी। इस मामले में कोतवाली पुलिस ने अपहरण एवं बलात्कार का केस दर्ज किया। विवेचना के दौरान 17 फरवरी 2011 को पुलिस ने लड़की को दो लोगों के साथ बरामद किया। उसके बाद पर्याप्त सबूत पाए जाने पर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। इसी बीच रामकरन की मौत हो गई। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोष सिद्ध पाए जाने पर चाचा छोटई एवं भतीजा राजेश को सजा सुनाई।
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