फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक गांव: जहां 68 सालों तक नहीं हुआ कोई अपराध

विज्ञापन
विज्ञापन
बभनी। जिस दौर में दिन की शुरुआत घटनाओं के साथ होती हो, वहां सूबे के अंतिम छोर पर बसे सोनभद्र का तेंदुअल एक ऐसा गांव है, जहां आजादी के बाद से 68 सालों तक एक भी अपराध दर्ज नहीं हुआ। छत्तीसगढ़ सीमा से सटे बभनी थाना क्षेत्र के इस गांव में गत शुक्रवार की रात जब एक महिला ने फांसी लगाकर खुदकुशी तो पूरा गांव हतप्रभ सा रह गया। खुद पुलिस का कहना था कि 28 दिसंबर की रात की घटना के पूर्व 1949 से इस तिथि तक के रिकार्ड इस गांव में किसी भी विवाद या घटना का जिक्र थाने के रजिस्टर में नहीं है, ना ही इस गांव के किसी व्यक्ति की किसी मामले में गिरफ्तारी का जिक्र है। प्रधानपति रमाशंकर भी इस बात की पुष्टि करते हैं। कहते हैं कि इस गांव में ज्यादातर आदिवासी रहते हैं, जिन्हें किसी भी तरह के दुनियावी छलावे से लेना-देना नहीं है। सभी लोग आपस में मिलजुलकर रहते हैं। एक दूसरे के सुख दुख में शामिल होते हैं और दिल से हाथ बंटाते हैं। यहीं कारण है कि अब तक आपराधिक रजिस्टर में इस गांव का नाम दर्ज नहीं हो पाया है। बताते चलें कि अति नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ सीमा से सटे तेंदुअल गांव में 700 की आबादी निवास करती है। इसमें 70 प्रतिशत से ज्यादा आदिवासी हैं। इस आदिवासी बाहुल्य गांव की स्थिति यह है कि रिकर्ड में 1949 के बाद या यूं कहे कि आजादी के समय से ही 28 दिसंबर तक कोई भी ऐसी घटना घटित नहीं हुआ, जिसका किसी भी रूप में पुलिस के रजिस्टर में जिक्र हो सके। जब 28 दिसंबर की रात तारावती पत्नी जयशंकर प्रसाद को फांसी लगने की सूचना मिली तो गांव का हर व्यक्ति सन्न सा रह गया। उधर, सीओ दुद्धी अभिषेक कुमार सिंह का कहना है कि यह बात सही है कि पुलिस के रिकार्ड में 28 दिसंबर से पूर्व किसी भी अपराध या घटना का जिक्र नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें