सोनभद्र। एफआईआर दर्ज कर मदद करने की बजाय कोई न कोई बहाना कर पीड़ितों को टरकाने वाली पुलिस का एक नया चेहरा सामने आया है। अब पुलिस न्यायालय से भेजी जाने वाली पत्रावलियों के गायब होने का बहाना बनाना शुरू कर दी है। इसका ताजा उदाहरण चार दिन पूर्व सीजेएम कोर्ट से राबर्ट्सगंज कोतवाली में टोयटा मोटर्स केे मालिक राजेंद्र गोयनका के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए भेजी गई पत्रावली का न मिलना है। सीओ विवेकानंद तिवारी ने कोतवाल को जांच करने का निर्देश दिया है।
सीजेएम कोर्ट ने राबर्ट्सगंज के हर्षनगर निवासी वीरेंद्र शुुक्ला के प्रार्थना पत्र की सुनवाई करने के बाद पुलिस को राजेंद्र गोयनका मालिक राजेंद्र टोयटा रोहनिया के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। वीरेंद्र के मुताबिक 25 अप्रैल को पैरोकार ने कोर्ट से आदेश की कॉपी कोतवाली में लाकर रिसीव करा दिया है। रविवार को कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ है या नहीं के बारे में पता किया गया तो मालूम हुआ कि कोर्ट की पत्रावली ही नदारद है। सूत्रों की मानें तो इसी तरह कई कागजात इधर-उधर हो जा रहे हैं। कोर्ट से संबंधित कागजातों को जब गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है तो आम लोगों के प्रार्थना पत्रों पर कितनी कार्रवाई होती होगी, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। क्षेत्राधिकारी विवेकानंद तिवारी ने कहा कि कोर्ट का कागजात नहीं मिलने का मामला संज्ञान में आया है। कोतवाल को पत्रावली का पता कर मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दे दिया गया है। जान बूझकर जो पुलिसकर्मी कागजात इधर-उधर कर रहे होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।