यूपी की सीमा में स्थित एनसीएल की कृष्णशिला (बीना) रेलवे साइड पर दो वर्ष पूर्व अवैध रूप से भंडारण के कारण जब्त कोयले के उठान में नया खेल शुरू हुआ है। कोयला यूपी से उठाया जा रहा है, लेकिन उसकी तौल करीब 10 किमी दूर मप्र में एक निजी कांटे पर की जा रही है।
कायदे से एक राज्य से दूसरे राज्य के लिए किसी तरह के खनिज (कोयला) को परिवहन करने के लिए ई वे बिल, ई खनिज, फाॅरेस्ट ट्रांजिट व कांटा पर्ची की जरूरत होती है लेकिन इन दस्तावेजों के बिना परिवहन से दो साल पहले जब्त करीब दस लाख टन कोयले व जिम्मेदारों की भूमिका को लेकर चर्चाएं जोरों पर है।
बीना चौकी क्षेत्र में स्थित कृष्णशिला रेलवे साइडिंग पर दो वर्ष पूर्व प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में 32 बीघा जमीन पर अवैध रूप से कोयला भंडारित किया गया था। बिना अनुमति भंडारण में कई और खामियां उजागर हुई थी। इसी के बाद भंडारित कोयले को सीज कर दिया गया था।
तब इस हाईप्रोफाइल मामले को तत्कालीन डीएम चंद्र विजय सिंह ने शासन के पाले में डाल दिया था। अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल भंडारित कोयले से 36 हजार पांच सौ टन कोयला रिलीज करने के आदेश पर उठान शुरू कराया गया है। बृहस्पतिवार से कोयले का उठान शुरू हुआ तो 100 से अधिक ट्रेलर, पेलोडर व पोकलेन मशीनों से हलचल बढ़ गई।
यह कोई नहीं बता रहा है कि बिना वैध परिवहन दस्तावेज के यूपी से कोयला मप्र कैसे भेजा जा रहा है। सोमवार को लदान की जगह पर लेखपाल व एक हेड कांस्टेबल की मौजूदगी रही। शेष व्यवस्था कोयला कारोबारी के गुर्गों ने संभाल रखी थी।
सवाल यह है कि बड़े ट्रेलरों में भरकर ढोए जाने वाले कोयले का सही वजन कैसे प्रमाणित किया जाएगा। लदान की जगह पर सरकारी मुलाजिम हैं मप्र में स्थित कांटा (तौल घर) पर कोई नहीं। रेलवे की कृष्णशिला साइडिंग पर झारखंड व छत्तीसगढ़ से छाई मंगाई जाती थी।
इसी छाई को कोयले में मिला कर उम्दा श्रेणी के कोयले को अलग कर ट्रकों से मंडी भेजा जाता था। छाई (निष्प्रयोज्य मैटेरियल) पहले ट्रकों से कृष्णशिला पहुंची फिर रेल रैक से। इसी के बाद इस मामले में बखेड़ा खड़ा हुआ और तत्कालीन थानेदार नागेश सिंह को खामियाजा भुगतना पड़ा। यही कारण था कि कृष्णशिला में कोयला जब्ती के बाद जिले के बड़े अफसर भी प्रकरण से दूरी बना लिए।
शक्तिनगर के प्रभारी निरीक्षक कुमुद शेखर सिंह ने कहा कि इस मामले में पुलिस को सरकारी कर्मियों को सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश मिला था, वह करा दिया गया। इसके अलावे इस मामले में पुलिस की कोई भूमिका नहीं है।
एडीएम सहदेव मिश्र ने कहा कि समस्त जांच के बाद वैलिड पेपर के आधार पर डीएम ने कोयला उठान का आदेश दिया है। इस मामले में इससे ज्यादा कुछ नहीं बता सकते।