सोनभद्र। गांव-गिरांव के लोग अब देश के किसी भी कोने में बैठ कर अपनी जमीन की वास्तविक स्थिति जान सकेंगे। भू-स्वामी के पास अपनी जमीन का वास्तविक डाटा बेस होगा। शासन की पहल पर अब जिले के सभी भू-मानचित्रों का जिओ रेफरेंसिंग होगी। इसके लिए कार्य भी शुरू कर दिया गया है। अगले दो महीने में इसे पूरा करना होगा। जिले में जमीन संबंधी विवादों में कमी लाने के लिए राजस्व विभाग की ओर से विभिन्न कार्यों से व्यापक स्तर पर सुधार के कार्य हो रहे हैं। अब जिले के सभी राजस्व गांवों के सभी गाटों को यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर आवंटित करने की तैयारी है। इसी क्रम में समस्त भू- मानचित्रों को जिओ रेफरेंस किया जाएगा। जिससे आने वाले दिनों में जमीनों के रिकॉर्ड एक क्लिक पर मिल सकेंगे। डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड मार्डनाइजेशन प्रोग्राम (डीआईएलआरएमपी) के तहत जमीनों के भू अभिलेखों को डिजिटलाइज का कार्य भी तेजी से शुरू है। सर्वे व डिजिटल नक्शे की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद सभी जमीनों को बाकायदा एक यूनिक नंबर दिया जाएगा। इन नंबर के जरिए आप कहीं भी बैठकर अपनी जमीन की स्थिति देख पाएंगे। संबंधित व्यक्ति के पास अपनी जमीन का वास्तविक डाटा बेस उपलब्ध होगा। विभाग का मानना कि इस कार्य के शतप्रतिशत हो जाने से भूमि संपत्ति विवादों के दायरे को भी कम किया जा सकेगा और भूमि अभिलेख रखरखाव प्रणाली में पारदर्शिता आएगी। ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग की ओर से इस योजना का संचालन किया जा रहा है। भू- मानचित्रों के जिओ रेफरेंस होने के बाद जिले के किसानों को उनकी भूमि का सही रिकार्ड, स्कूल, कार्यालय, धार्मिक स्थल सहित अन्य की सही लोकेशन मिलेगी। वहीं विवादों को सुलझाने में भी सहुलियत होगी।