सोनभद्र। अति पिछड़े व दुरूह इलाके के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं समय पर उपलब्ध कराने के लिए सीएचसी बभनी को पीपीपी मॉडल पर चलाने की मंजूरी मिल गई है। इस पहल से आदिवासी बहुल इस इलाके की सीएचसी से लोगों को अल्ट्रासाउंड, एक्सरे सहित अन्य आधुनिक सुविधाएं मिलेगी। जल्द ही इसके लिए प्रक्रिया शुरू होने का अनुमान है।
छत्तीसगढ़ सीमा से सटे बभनी ब्लाक से मुख्यालय की दूरी सवा सौ किमी से भी अधिक है। यहां सीएचसी पर पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी, टीकाकरण सहित अन्य कार्यक्रमों पर असर पड़ रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत गर्भवती महिलाओं के इलाज में आ रही है। लंबी दूरी होने के कारण यहां से मरीजों को अस्पताल पहुंचने में काफी वक्त लग जाता है। लिहाजा मरीज निजी अस्पतालों की शरण लेने को मजबूर होते हैं। आदिवासी अंचल के लोगों की सहूलियत के लिए शासन ने जिले की एक सीएचसी को पीपीपी मोड पर चलाने का प्रस्ताव मांगा था। इसके लिए बभनी सीएचसी का नाम प्रस्तावित किया गया था। अब इसे मंजूरी मिल गई है। स्वास्थ्य विभाग की मानें तो पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के माध्यम से सीएचसी का संचालन होने से यहां अल्ट्रासाउंड, एक्सरे के अलावा सीजेरियन प्रसव की भी सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। अन्य बीमारियों में भी बेहतर उपचार के लिए लोगों को जिला अस्पताल पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। रेफरल मरीजों की संख्या में कमी होगी। मंजूरी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग भी जरूरी तैयारियों में जुट गया है। यहां आवश्यकता के अनुसार जरूरी भवन और सहित अन्य निर्माण कार्य होंगे।
बढ़ेगी यह सुविधाएं
सीएचसी बभनी पर एक्सरे और अल्ट्रासाउंड मशीन लगेगी। कई तरह के खून जांच होगी, जो अब तक नहीं थी। इसका संचालन शुरू होने के बाद मरीजों को निजी पैथालॉजी पर जांच के लिए भारी भरकम रकम चुकाने से राहत मिलेगी। वहीं चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे विभाग को थोड़ी राहत मिलेगी। डॉक्टरों की संख्या बढ़ने के साथ साफ-सफाई, बेड की भी सुविधा बढ़ेगी।
जिले से शासन को बभनी सीएचसी को पीपीपी मॉडल पर संचालित करने का प्रस्ताव भेजा गया है। इससे यहां जरूरी सुविधाओं में इजाफा होगा। जरूरी संसाधन भी बढ़ेंगे। - डॉ. रमेश सिंह ठाकुर, सीएमओ।