सीएमडी ने निरीक्षण के बाद चारकोल और वहां एकत्रित कोयले के सैंपल इकट्ठा कर उसकी जांच करने के भी आदेश दिए हैं। इसके साथ ही प्रबंधन के अधिकारियों को जांच विभागों की पूरी सहायता करने की हिदायत दी है। एक मिलियन टन कोयला मिलने के बाद प्रारंभ हुई जांच में बड़े-बड़े कारोबारियों के नामों का उजागर होना तय है।
हालांकि अब तक अधिकारियों के पास कोयले व चारकोल के स्वामित्व की फाइल लेकर एक भी कारोबारी नहीं पहुंचा है। चार सालों से कोयले का कारोबार कर व्यापारियों ने मोटी रकम तो कमाई है लेकिन इस जांच और सीज किए गए कोयले ने सभी के पसीने छुड़ा दिए हैं। अब अधिकारियों के दफ्तरों में एक भी कारोबारी या उनके गुर्गे पहुंच कर इस कोयले का स्वामित्व लेने से भी कतरा रहे हैं।
कृष्णशीला रेलवे साइडिंग पर पिछले चार दिनों से चारकोल लदी रैक खड़ी है, लेकिन इसे लेने कोई नहीं पहुंचा है। इस रैक के तार भी अवैध भंडारण से ही जुड़ा होना माना जा रहा है। लिहाजा इसके स्वामित्व को लेकर सभी मौन हैं। रेलवे में रैक की बुकिंग के दौरान ही इसे पाने, उतरवाने वालों का पूरा ब्योरा अंकित होता है। इसके बावजूद चार दिन बीतने पर भी टीम उन तक पहुंच नहीं हो पाई है।
कोयला खदान क्षेत्र में रेल रैक से चारकोल आना ही मिलावट के खेल को साफ जाहिर कर रहा है। सूत्रों की मानें तो भंडारित कोयला पावर प्लांटों को भेजे जाने वाले लिंकेज कोयला का ही हिस्सा हो सकता है। लिंकेज कोयले में चारकोल की मिलावट कर उसे पावर प्लांटों को भेज दिया गया, उससे हुई अतिरिक्त मात्रा को यहां भंडारित कर बाजार में पहुंचाया जाता रहा है।