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Sonebhadra News: जिला अस्पताल में गहराया खून का संकट, महज 14 यूनिट ही ब्लड बचा

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जिले में खून का संकट खड़ा हो गया है। नेगेटिव ग्रुप का खून नहीं है। राबर्ट्सगंज स्थित 500 यूनिट वाले ब्लॅड बैंक में मौजूदा समय में महज 14 यूनिट ही खून (ब्लड) बचा है। खून की कमी से रोजाना मरीज लौट रहे हैं। इससे उनकी जान पर आफत आ जाती है।
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22 लाख की आबादी वाले आदिवासी बहुल जनपद में एक बड़ा तबका खून की कमी से जूझ रहा है। गरीबी, जागरूकता का अभाव और खाने में पोषक तत्वों की कमी से लोग एनिमिया के शिकार बन रहे हैं।
जिला अस्पताल के अधीन राबर्ट्सगंज नगर में ब्लड बैंक स्थापित है। इस बैंक के जरिए सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को खून दिया जाता है। इसके अलावा अन्य प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती मरीजों को खून की जरूरत होने पर इस बैंक से ही खून की सुविधा मिलती है।
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ब्लड बैंक की क्षमता 500 यूनिट की है। शनिवार को ब्लड बैंक में 18 यूनिट खून था, जो रविवार की दोपहर तक घटकर 14 यूनिट ही बचा। मरीजों को संबंधित ग्रुप के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं दुद्धी सीएचसी स्थित ब्लड बैंक में सौ की बजाय करीब 22 यूनिट खून बचा है।

निगेटिव ग्रुप का खून नहीं
रविवार दोपहर तक बैंक में केवल 14 यूनिट ही खून बचा है। जिसमें ए पॉजिटिव 5, बी पॉजिटिव 3, ओ पॉजिटिव 4, एबी पॉजिटिव 1 और ओ पॉजिटिव 1 यूनिट हैं। सबसे अधिक किल्लत नेगेटिव ग्रुप की है। ओ नेगेटिव को छोड दें तो किसी भी नेगेटिव ग्रुप का खून उपलब्ध नहीं है। अगर इस ग्रुप के अलावा किसी को अन्य ग्रुप की जरूरत पड़ जाए तो उसको इस बैंक से खून मिलना मुश्किल हो रहा है।

55 थैलेसीमिया मरीज हैं पंजीकृत
जिले में साल दर साल थैलेसीमिया के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। जिले में करीब 55 थैलेसीमिया मरीज ब्लड बैंक में पंजीकृत हैं। थैलेसीमिया में हीमोग्लोबिन बनने की प्रक्रिया गड़बड़ाने लगती है। थैलेसीमिया पीड़ित मरीज के शरीर में खून की भारी कमी हो जाने से उसे बार-बार खून चढ़ाना पड़ता है। ऐसे मरीजों को बिना डोनर खून देना होता है। इन मरीजों की जान पर भी संकट है।

संबंधित ग्रुप का डोनर जरूरी
जिला अस्पताल की बात करें तो रोजाना छह से 10 यूनिट ब्लॅड बैंक से जरूरतमंदों को खून जाता है। ऐसे में यह लोग रोजाना खून लेने आते है तो संबंधित ग्रुप न होने पर मरीज के ग्रुप का डोनर उनसे लाने की बात कहकर वापस कर दिया जाता है। यदि वह डोनेटर की व्यवस्था कर लेते है, तभी उनको खून उपलब्ध हो पाता है। यदि कोई इमरजेंसी में खून की जरूरत पड़ जाए तो उसको यहां से खून मिलना मुश्किल हो रहा है। इस कमी लोगों की जान पर भारी पड़ रही है।
रक्तदान के लिए लोग नहीं आ रहे आगे
जिले में खून की कमी है। हालांकि रक्तदान के लिए बहुत कम लोग आ रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग, पंचायतीराज विभाग, पुलिस बल सहित अन्य विभागों में बड़ी संख्या में कर्मी हैं। हालांकि इनकी ओर से भी रक्तदान को लेकर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई जाती है। स्वास्थ्य विभाग कैंप लगाना तो चाहता है। मगर रक्तदाताओं की कमी परेशानी का कारण बन गई है।
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