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Sonebhadra News: नगर की प्यास बुझाने वाली भेलाही बंधी सूखी, उड़ रही धूल

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सोनभद्र। यह कोई पोखरा या तालाब नहीं। यह भेलाही बंधी है। जी हां, वही भेलाही बंधी, जो राबर्ट्सगंज नगर व आसपास के गांवों के हजारों परिवारों की प्यास बुझाती है। भीषण गर्मी का ऐसा असर हुआ कि पानी से लबालब रहने वाली इस बंधी में खुद की प्यास बुझाने के लिए भी पानी नहीं है। बंधी के अधिकांश हिस्से में इन दिनों धूल उड़ रही है। तली के अंदर का कीचड़ भी सूख चुका है। मुहाने पर महज आठ इंच पानी शेष है, जो पशुओं के काम आ रहा है। गर्मी का यही प्रकोप रहा तो जल्द ही वह भी सूख जाएगा। भेलाही बंधी की यह दशा नगर में पेयजल संकट की हालत बताने को काफी है।
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लोढ़ी स्थित भेलाही बंधी में एकत्रित पानी को ही शोधित कर नगर पालिका का जलकल विभाग नगर में जलापूर्ति करता है। पुराने पाइप लाइन से जुड़े करीब 32 सौ कनेक्शनधारियों को इससे पानी मिलता है। इसके अलावा लोढ़ी स्थित सरकारी कॉलोनी व कई अन्य क्षेत्रों में यहीं से पानी जाता है। बंधी के सूखने के बाद संबंधित इलाकों में पानी का संकट गहराया हुआ है। पुराने पाइप लाइन से जुड़े उपभोक्ताओं को राबर्ट्सगंज पेयजल पुनर्नठन परियोजना के माध्यम से धंधरौल बांध से पानी लेकर जलापूर्ति की जा रही है, लेकिन अन्य हिस्से टैंकर के पानी के भरोसे है। साधन संपन्न लोग तो सब सबमर्सिबल से पानी का इंतजाम कर ले रहे हैं, मगर जन सामान्य को किल्लत से जूझना पड़ रहा है। जिम्मेदारों का कहना है कि इस बार समय पर और अच्छी वर्षा नहीं हुई तो धंधरौल बांध में भी तेजी से खिसकते जलस्तर के कारण आगामी दिनों में पानी का संकट और भयावह हो सकता है।
भेलाही बंधी के सूखने के कारण धंधरौल बांध से पानी लेकर नगर पालिका की टंकियों को भरा जा रहा है। वहां से पुरानी लाइन के माध्यम से पेयजल कनेक्शनधारियों को पर्याप्त पानी मिल रहा है। फिलहाल इस इलाके में दिक्कत नहीं है, लेकिन अन्य क्षेत्रों में समस्या हो सकती है। - आशीष यादव, जेई, राबर्ट्सगंज पेयजल पुनर्गठन परियोजना।
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