धान खरीद को शुरू हुए 25 दिन बीत गए हैं, लेकिन अभी भी जिले में खरीद रफ्तार नहीं पकड़ पा रही। कहीं 300 क्विंटल तो कहीं 1300 क्विंटल ही धान की खरीद हो सकी है। किसान सत्यापन में उलझे हुए हैं तो कहीं रेट को लेकर दिक्कत बनी हुई है।
महीन धान के लिए केंद्रों पर कम रेट होने से किसान उसे बाजार में ले जा रहे हैं। उधर, अफसरों की दलील है कि अभी किसान कटाई और मड़ाई में जुटे हुए हैं। शीघ्र ही खरीद को गति मिलेगी। किसानों को उपज का उचित मूल्य देने के लिए जिले में पांच खरीद एजेंसियों के 94 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं।
सबसे ज्यादा 32 क्रय केंद्र मार्केटिंग के हैं, जबकि पीसीएफ ने 27 क्रय केंद्र खोले हैं। इसके अलावा पीसीयू के 20, यूपीएसएस के 14 और एफसीआई का एक क्रय केंद्र है। इनमें एक तिहाई केंद्र ऐसे हैं, जिन पर खरीद शुरू नहीं हो पाई है। केंद्र प्रभारियों की दलील है कि अभी किसान नहीं आ रहे।
ज्यादातर किसान फसल की कटाई, मड़ाई और उसे सूखाने में लगे हैं। बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति करमा धान क्रय केंद्र पर अभी तक 1300 क्विंटल धान की खरीद की गई है। इसी तरह फुलवारी केंद्र पर 600 क्विंटल और पांपी केंद्र पर 1527 क्विंटल धान की खरीद हो चुकी है।
इन केंद्रों पर 10 हजार क्विंटल धान खरीदने का लक्ष्य निर्धारित है। प्रबंध निदेशक धीरज कुमार तिवारी ने बताया कि इन केंद्रों पर धान आने का सिलसिला शुरू है। सभी व्यवस्थाएं पूरी हैं। उधर, चतरा ब्लाक में धान खरीद केंद्र हाट शाखा चतरा पर शनिवार तक कुल 1300 क्विंटल की खरीद हो चुकी है।
हाट शाखा तेंलग की खरीद रामगढ़ मंडी में हो रही है। विपणन निरीक्षक शिवसागर के मुताबिक यहां कुल 300 क्विंटल खरीद अब तक हुई है। सारी तैयारी पूरी है। किसानों का इंतजार किया जा रहा है।
बाजार में बेच रहे महीन धान
पगिया गांव के किसान रवींद्र बहादुर सिंह का कहना है कि क्षेत्र के अधिकांश किसानों ने महीन धान की खेती की है। अमन जैसे धान को सरकारी केंद्रों पर सामान्य धान का मूल्य मिल पाता है। बाजार में महीन धान सरकारी दर से अधिक पर बिक रहा है। ऐसे में किसान अपना धान बाहर भी बेच दे रहे हैं। उन्हें अधिक मुनाफा मिल रहा है। मोटे धान की जिन किसानों ने खेती किया है, वह अपना धान सरकारी क्रय केंद्रों पर लेकर जा रहे हैं।