फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ऐशडैम में कोयला राख का अनियंत्रित भराव बड़ी चुनौती

विज्ञापन
विज्ञापन
सोनभद्र। बिजली परियोजनाओं में जलाए जाने वाले कोयले की राख का ऐशडैम में हो रहा अनियंत्रित भराव प्रदूषण बढ़ाने के साथ पर्यावरण के लिए भारी पड़ने लगा है। अत्यधिक राख भराव के चलते महज डेढ़ साल के भीतर जिले से सटे मध्य प्रदेश के सिंगरौली में तीन बिजली परियोजनाओं के राख बांध टूटने से दस से अधिक लोग जान गवां चुके हैं। वहीं अन्य परियोजनाओं के ऐशडैम में भी अनियंत्रित तरीके से हो रहा राख का भराव खतरा बना हुआ है। हेल्थी एनर्जी इनीशिएटिव इंडिया और कम्युनिटी एनवायरमेंटल मानीटरिंग की शनिवार की जारी रिपोर्ट में जनवरी 2010 से जून 2020 तक देश में राख बांध से जुड़ी 76 गंभीर घटनाएं सामने आईं। इसमें सिंगरौली में हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए बताया गया है किे पिछले 10 अप्रैल 2020 को रिलांयस सासन पावर के ऐशडैम टूटने के चलते छह लोगों की जान चली गई थी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कोयले की राख खतरनाक प्रदूषक तत्व है, जिसमें सीसा, आर्सेनिक, पारा और कैडमियम जैसे खतरनाक रासायनिक तत्व तो होते हैं। इसमें यूरेनियम की भी मात्रा हो सकती है, जो पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए हानिकारक है। सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी के संयोजक रामेश्वर भाई का कहना है कि एनजीटी की तरफ से गठित कोर कमेटी 2014 में ही सोनभद्र और सिंगरौली स्थित ऐशडैम के हालत पर चिंता जता चुकी है। अगस्त 2015 की रिपोर्ट में जिक्र किया गया था कि ऐशडैम की स्थिति नहीं सुधारी गई और जरूरत को देखते हुए नए ऐशडैम नहीं स्थापित किए गए तो ये ऐशडैम पर्यावरण, मानव स्वास्थ्य के के लिए हानिकारक हो सकते हैं। उधर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी राधेश्याम का कहना है कि दो दिन पूर्व एनजीटी ओवरसाइट कमेटी की बैठक में इस मसले पर गंभीरता से चर्चा हुई थी। परियोजना प्रबंधकों को ऐश डाइक की सुरक्षा और राख के ज्यादा से ज्यादा सुरक्षित निस्तारण के संबंध में आवश्यक दिशानिर्देश दिए गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें