दीपोत्सव पर अस्थाई रूप से पटाखों की दुकान लगाने के लिए आवेदन आने शुरू हो गए हैं। लेकिन अभी तक स्थान चिह्नित नहीं हो सके हैं। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में 11 स्थानों पर दुकानें लगती रही हैं।
रॉबर्ट्सगंज में पटाखा दुकान के लिए हाइडिल मैदान चिह्नित है, मगर इस बार यहां प्रदर्शनी-मेले के चलते नई जगह पर दुकानें लगेंगी। इस दौरान सुरक्षा मानकों का पालन कराने के लिए भी सक्रियता बढ़ा दी गई है।
पटाखा दुकानदारों को अस्थाई लाइसेंस जारी किया जाता है। दुकानें एक स्थान पर ऐसे परिसर में लगाई जाती हैं, जहां अग्नि सुरक्षा से बचाव के पर्याप्त इंतजाम हों। गत वर्ष जिले में 11 स्थानों पर करीब 200 दुकानें लगी थीं। रॉबर्ट्सगंज में हाइडिल मैदान पटाखा दुकानों के लिए चिह्नित है।
इसके अलावा ओबरा, रेणुकूट में गांधी मैदान, दुद्धी में टाउन क्रिकेट क्लब का मैदान, चोपन में रेलवे का सब्जी मंडी मैदान, अनपरा बाजार की पुलिया, डाला में रामलीला मैदान, म्योरपुर में आश्रम मोड़, शक्तिनगर में ज्वालामुखी मंदिर के समीप खाली परिसर में दुकानें लगी थीं।
अस्थाई लाइसेंस के लिए दुकानदारों के आवेदन आने लगे हैं, लेकिन अभी तक स्थान तय नहीं हो पाया है। सबसे असमंजस में रॉबर्ट्सगंज के दुकानदार हैं। यहां दुकानें हाइडिल मैदान में लगती थीं, मगर इस बार यहां प्रदर्शनी व मेला का आयोजन हो रहा है।
विकल्प के तौर पर रामलीला मैदान है, लेकिन मुख्य बाजार में आबादी के बीच स्थित इस मैदान में प्रवेश का एक ही द्वार है। दूसरा गेट बंद रहता है तो तीसरा संकरा रास्ता सिर्फ पैदल आवागमन के लिए है। ऐसे में दुकानदार भी संशय में हैं।
इन मानकों का रखना होगा ध्यान
पटाखा दुकान लगाने वालों को सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करना होगा। इसके तहत दुकानों की छत टीन शेड की होगी। उन पर दो-दो अग्निशमन यंत्र, पानी से भरा ड्रम, बालू आदि सामान रखने होंगे। किसी भी दुकान पर दीपक, हाइलोजन, तेल या गैस से जलने वाले उपकरण नहीं रखे जाएंगे। दुकानें एल आकार में और एक-दूसरे से तीन-तीन मीटर की दूरी पर होंगी।