सोनभद्र। जिले में बृहस्पतिवार को एक और किशोरी को बालिका वधू बनने से बचा लिया गया। जुगैल थाना क्षेत्र के कुंडवासिनी मंदिर परिसर में नाबालिग की शादी रचाए जाने की सूचना पर पहुंची टीम ने विवाह रुकवा दिया। परिवार वालों को बाल विवाह अपराध बताते हुए पीड़िता को विधिक संरक्षण में लेते हुए मुख्यालय लाया गया। बाल कल्याण समिति के आदेश पर उसे बाल गृह बालिका में आवासित करा दिया गया। दोपहर में चाइल्ड हेल्पलाइन पर सूचना मिली कि कुंडवासिनी मंदिर परिसर में नाबालिग का विवाह कराया जा रहा है। जानकारी मिलते ही परियोजना समन्वयक मुकेश सिंह चाइल्ड हेल्पलाइन के सुपरवाइजर सुधा गिरी, सत्यम चौरसिया और केसवर्कर सीमा शर्मा की टीम गठित कर मौके पर पहुंचने के लिए कहा गया। टीम जुगैल थाने से समन्वय स्थापित करते हुए वहां पहुंची तो शादी की तैयारियां चल रही थीं। उम्र संबंधी प्रमाण की जांच की गई तो दुल्हन नाबालिग मिली। दूल्हे की भी उम्र शादी के निर्धारित उम्र 21 वर्ष से कम पाई गई। विवाह के वक्त लड़की की उम्र 18 और लड़के की 21 वर्ष से कम होने को अपराध बताते हुए तत्काल शादी रोकवा दी गई। कहा गया कि बाल विवाह कराने वाले माता-पिता, पंडित/काजी एवं शामिल अन्य लोगों को दो वर्ष तक कठोर कारावास और जुर्माना हो सकता है। यह गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध तो है ही बालिग होने पर पीड़ित दो वर्ष के भीतर ऐसे विवाह को शून्य भी घोषित करवा सकता है। पीड़िता को थाने लाकर उसकी काउंसलिंग की गई। इसके बाद बाल कल्याण समिति के सामने प्रस्तुत किया गया। जिला समन्वयक मुकेश सिंह ने बताया कि पीड़िता को बाल गृह बालिका में आवासित करा दिया गया है। अपील की कि कहीं भी बाल विवाह या बाल अधिकारों का उल्लंघन होता मिले तो टोल फ्री नंबर 1098 पर सूचना दें। सूचनादाता का नाम-पता गोपनीय रखते हुए कार्रवाई की जाएगी।