म्योरपुर। स्थानीय विकास खंड की विभिन्न ग्राम पंचायतों में मलेरिया संक्रमण की स्थिति और इसके प्रभाव का अध्ययन करने के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की टीम ग्रामीणों के रक्त के नमूने एकत्र कर रही है। टीम इससे पहले क्षेत्र में मच्छरों की प्रजातियों और उनके संक्रमण फैलाने की क्षमता का अध्ययन कर चुकी है। अब मलेरिया से प्रभावित लोगों पर शोध किया जा रहा है। आईसीएमआर की टीम ने बेलहत्थी, पाटी, मकरा सहित अन्य गांवों में ग्रामीणों के रक्त के नमूने लेना शुरू किया है। एकत्र किए गए नमूनों को म्योरपुर सीएचसी में सुरक्षित रखा जा रहा है, जहां से उन्हें गोरखपुर स्थित आईसीएमआर केंद्र भेजा जा रहा है। टीम मलेरिया संक्रमण की स्थिति, इसके फैलाव और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर रही है। स्वास्थ्य कर्मियों ने रक्त के नमूने लेने के साथ ग्रामीणों को मलेरिया से बचाव के उपायों की जानकारी भी दी। टीम में पब्लिक हेल्थ एवं इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ सूरज कुमार मौर्य, लैब टेक्नीशियन बृजेश्वर और प्रिंस यादव शामिल रहे। बताया गया कि आईसीएमआर की टीम क्षेत्र में पाई जाने वाली मच्छरों की विभिन्न प्रजातियों पर भी अध्ययन कर रही है। इसके तहत मच्छरों की प्रजाति, उनकी संक्रमण फैलाने की क्षमता और मच्छर जनित बीमारियों से जुड़े कारणों की जानकारी जुटाई जा रही है। शोध के आधार पर भविष्य में मलेरिया की रोकथाम और उपचार से संबंधित उपायों को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। टीम मलेरिया के मामले में लगातार निगरानी कर रहा है। संदिग्ध मरीजों की जांच कराने के साथ ग्रामीणों को घरों के आसपास साफ-सफाई रखने, पानी जमा नहीं होने देने और मच्छरदानी का प्रयोग करने की सलाह दी जा रही है। जिला मलेरिया अधिकारी धर्मेंद्र नारायण श्रीवास्तव ने कहा कि आईसीएमआर की टीम म्योरपुर इलाके में कैंप कर जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि वह किस विषय पर काम कर रही है, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।