रेणुकूट-हाथीनाला मार्ग पर लगा वाहनों का कतार, आर्काइव
रेणुकूट। हाथीनाला से अनपरा के बीच रीवा-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग का अधूरा और कई जगह सिंगल रूट होना लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। भारी वाहनों के लगातार दबाव, संकरे मार्ग और कई खतरनाक मोड़ों के कारण यह मार्ग हादसों का हॉट स्पॉट बनता जा रहा है। पिछले दो माह में अलग-अलग सड़क हादसों में 11 राहगीरों की जान जा चुकी है। वहीं 20 से अधिक लोग घायल हुए हैं। हादसों के बाद लगने वाला लंबा जाम भी लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन रहा है। कई बार एंबुलेंस समेत जरूरी सेवाओं के वाहन घंटों जाम में फंसे रहते हैं। पिछले करीब दो महीने में हुईं घटनाओं पर नजर डालें तो मार्ग की स्थिति की गंभीरता सामने आती है। 10 सितंबर को मुर्धवा-हाथीनाला मार्ग पर ट्रक खराब होने के बाद सड़क पर खड़े चालक को पिकअप ने रौंद दिया था। हादसे में उसकी मौत हो गई। खराब ट्रक के कारण मालोघाट से पिपरी तक करीब 30 किलोमीटर लंबा जाम लग गया था। इसी जाम में फंसने के दौरान 11 सितंबर को पिपरी थाना क्षेत्र में एक बस परिचालक की भी मौत हो गई। इससे पहले 26 अगस्त को मकरा गांव के समीप अज्ञात वाहन की टक्कर से दो युवकों की मौत हुई थी। 18 अगस्त को खाड़पाथर मोड़ पर ट्रक और ट्रेलर की टक्कर के बाद चालक को जंजीर के सहारे केबिन से बाहर खींचकर बचाया गया था। हादसे के बाद काफी देर तक मार्ग बाधित रहा। छह अगस्त को मुर्धवा-बीजपुर मार्ग पर डीजल टैंकर और कोयला लदे ट्रक की टक्कर में चालक की मौत हो गई थी। हादसे के बाद घंटों जाम लगा रहा। 29 जुलाई को हाथीनाला थाना क्षेत्र की भूतहिया पुलिया में ट्रेलर गिरने से चालक की मौत हो गई थी। चालक करीब चार घंटे तक केबिन में फंसा रहा। वहीं, 10 जुलाई को पिपरी थाना क्षेत्र के मड़इया गांव में ट्रेलर की टक्कर से तीन युवकों की मौत हो गई थी। इस तरह 10 जुलाई से 11 सितंबर के बीच हुई घटनाओं में नौ लोगों की जान जा चुकी है। इससे पहले भी भूतहिया पुलिया के पास कई घटनाएं हो चुके हैं। बीते अप्रैल माह में एक ट्रक चालक केबिन में फंसने की वजह से जिंदा जल गया था। स्थानीय लोगों ने हाथीनाला-रेणुकूट मार्ग के खतरनाक हिस्सों को चिह्नित कर वहां सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने, भूतहिया पुलिया और घुमावदार मोड़ों पर पर्याप्त संकेतक लगाने तथा सिंगल रूट वाले हिस्से को जल्द फोरलेन करने की मांग की है। मुर्धवा से हाथीनाला के बीच भूतहिया पुलिया के आसपास कई घुमावदार मोड़ हैं। इन स्थानों पर पहले भी लगातार हादसे होते रहे हैं। पर्याप्त संकेतक, सुरक्षा अवरोध और अन्य यातायात सुरक्षा इंतजाम न होने से दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है। घुमावदार सड़क पर तेज रफ्तार से आने वाले भारी वाहन सामने से आने वाले वाहनों के लिए भी खतरा पैदा करते हैं। रीवा-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग का झारखंड वाला हिस्सा फोरलेन हो चुका है, जबकि अनपरा के आगे भी मार्ग फोरलेन है। इसके बीच विंढमगंज से अनपरा तक का हिस्सा अधूरा और कई जगह सिंगल रूट है। हाथीनाला-रेणुकूट क्षेत्र में भारी वाहनों का दबाव लगातार बढ़ने से इस हिस्से पर यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। किसी वाहन के खराब होने या हादसे के बाद सड़क पर वाहनों की कतार लग जाती है। हादसे के बाद लगने वाले लंबे जाम का असर सिर्फ सड़क यातायात तक सीमित नहीं है। जाम में दोपहिया वाहन चालकों तक का निकलना मुश्किल हो जाता है। कई बार एंबुलेंस और जरूरी सेवाओं के वाहन भी घंटों फंसे रहते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक लंबे जाम के कारण यात्रियों की ट्रेन और फ्लाइट तक छूट जाती है। नौकरी, कारोबार, स्कूल, अस्पताल और अन्य जरूरी काम प्रभावित होते हैं।