वीराजी देवी और बालम कोल की फ़ाइल फोटो
घोरावल। तहसील क्षेत्र की अहरौरा ग्राम पंचायत के राजिम गांव में करीब 90 वर्षों तक साथ निभाने वाले वृद्ध दंपती की जीवन यात्रा का अंत भी एक-दूसरे से जुदा होकर नहीं हुआ। 102 वर्षीय वीराजी देवी ने सोमवार दोपहर बाद अंतिम सांस ली। परिजनों ने दीवा गांव में बेलन नदी के किनारे उनका अंतिम संस्कार किया। अभी पत्नी की चिता ठंडी भी नहीं हुई थी कि मंगलवार सुबह करीब सात बजे उनके 105 वर्षीय पति बालम कोल ने भी दम तोड़ दिया। बालम कोल की मौत की खबर मिलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों और ग्रामीणों ने वीराजी देवी की चिता स्थल पर ही बालम कोल का अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। जिस स्थान पर कुछ घंटे पहले वीराजी देवी को अंतिम विदाई दी गई थी, वहीं मंगलवार को उनके पति को भी पंचतत्व में विलीन कर दिया गया। गांव निवासी सफेदलाल और हनुमान प्रसाद बैसवार ने बताया कि दोनों ने करीब नौ दशक तक एक-दूसरे का सुख-दुख में साथ निभाया। जीवन के अंतिम पड़ाव में भी दोनों का साथ संयोग से इस तरह जुड़ा कि पत्नी की मौत के कुछ ही घंटे बाद पति ने भी दुनिया छोड़ दी। ग्रामीण इस संयोग को उनके अटूट दांपत्य प्रेम और जीवनभर के साथ की मिसाल बता रहे हैं।