इलाके के सततवाहिनी नदी के तट पर स्थित बाबा डिहवार के चौरे पर माघ पूर्णिमा के अवसर पर बुधवार को सत्यनारायण भगवान की कथा सुनने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। पुजारी वेद मोहनदास ने बताया कि बाबा डिहवार के दरबार में जो कोई भी सच्चे मन से मन्नत मांगता है, उसकी मन्नत अवश्य पूरी होती है। इसी का नतीजा रहा कि यहां पर झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश से लोग अपने निजी साधन एवं सवारी गाड़ी से सत्यनारायण भगवान की कथा सुनने के लिए आते हैं। झारखंड से आए रामविलास यादव ने बताया कि शादी हुए लगभग छह वर्ष बीत गए, परंतु एक भी बच्चे नहीं होते थे। बाबा डिहवार से मनौती माना तो बच्चे हुए। छत्तीसगढ़ से आए श्याम बिहारी ने बताया कि अक्सर लोग बीमार हो जाया करते थे। बाबा डिहवार से मनौती माने थे कि घर परिवार अच्छा रहे तो माघ पूर्णिमा पर आकर कथा सुनेंगे। एक वर्ष तक घर के सारे सदस्य सकुशल रहे, जिसकी वजह से यहां आकर कथा सुनी गई। पुजारी वेद मोहनदास जी ने बताया कि बाबा डिहवार के चबूतरा एवं स्थान बरसों पुराना है इनकी महिमा अपरंपार है।