सोनभद्र। कोलकाता में महिला डॉक्टर के साथ हुई दरिंदगी को लेकर चल रही डॉक्टरों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवा लड़खड़ा गई है। तीन दिन से जारी हड़ताल से 80 से अधिक ऑपरेशन टल गए। काउंटर से लोगों को दवा भी नहीं मिल रही है। 99 फीसदी सर्जरी ठप हो गई है।
आईएमए के आह्वान पर सोनभद्र मेडिकल काॅलेज के रेजिडेंट डॉक्टर शुक्रवार से हड़ताल पर हैं। इसका खामियाजा मरीजों और तीमारदारों को उठाना पड़ रहा है। भले ही शासन ने मेडिकल काॅलेज के सीनियर चिकित्सकों और जिला अस्पताल में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधीन कार्यरत चिकित्सकों और कर्मचारियों को हड़ताल से दूर रहने का निर्देश दिया है लेकिन इसका कोई खास असर नहीं हैं। अस्पताल में न तो कोई जांच हो रही है न सर्जरी। गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जा रहा है। वह निजी अस्पतालों में जाने को विवश हैं।
आंकड़ों पर गौर करें तो वरिष्ठ चिकित्सकों के हड़ताल में शामिल न होने के बावजूद वे काम नहीं कर रहे हैं। कोई उपस्थिति दर्ज कर इधर-उधर टहल रहा है तो कोई उपस्थिति के बाद अपने निजी कामाें में जुट जा रहा है। इससे जिला अस्पताल की 99 फीसदी सर्जरी प्रभावित है। हड़ताल के दौरान हाइड्रोसील, पथरी, एक्सीडेंटल और मारपीट में हड्डी संबंधित, डेंटल, नाक, कान गला, नेत्र संबधित कुल 80 सर्जरी प्रभावित हुई है। इसमें मेजर और माइनर दोनों शामिल हैं। इसमें डेंटल के 20, हड्डी के दस मामले भी शामिल हैं। ऐसे में इन मरीजों को परेशानी हो रही है तो दूसरी ओर ऐसे मरीज जिन्हें ऑपरेशन की जरूरत है वे भी भर्ती नहीं किए जा रहे हैं। इमरजेंसी के मरीज रेफर हो रहे हैं तो ओपीडी बंद होने से नए मरीजों की पहचान नहीं हो रही है।
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गर्भवतियों के लिए परेशानी
देशभर में चल रहे रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल के बीच गर्भवती महिलाओं की समस्या भी बढ़ गई है। पड़ताल के दौरान सामने आया कि शुक्रवार, शनिवार और रविवार को एक भी प्रसव जिला अस्पताल में नहीं हुआ। रविवार को दोपहर ड़ेढ़ बजे महिला वार्ड में गर्भवतियों व प्रसूताओं के लिए रिजर्व 11 बेड में से दस बेड खाली मिले, जबकि एक पर पिछले दिनों भर्ती एक प्रसूता मिली, जिसे सुबह ही छुट्टी दे दी गई थी। वह गाड़ी आने का इंतजार कर रही थी। साथ मौजूद लोगों ने बताया कि हड़ताल वाले दिन से कोई मरीज भर्ती नहीं हो रहा है। जो थे, उन्हें छुट्टी दे दी गई। नए मरीजों को दूसरे अस्पताल जाने के लिए कहा जा रहा है। इससे लोग प्राइवेट अस्पताल जा रहे हैं।
अघोषित रूप से दे रहे समर्थन
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य निदेशालय के अधीन आने वाले जिला अस्पताल के तहत नियुक्त कर्मी भी हड़ताल में अघोषित रूप से शामिल हो रहे हैं। इसमें नियमित और संविदा दोनों तरह के कर्मी शामिल हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शुक्रवार को जहां दवा काउंटर से मरीजाें को दवाएं नहीं मिलीं तो शनिवार को भी ऐसी स्थिति बनी रही। एक्सरे और अल्ट्रासाउंड के लिए भी लोग भटकते रहे। पैथाेलाॅजी में सिर्फ भर्ती मरीजों की ही जांच हो रही है। इससे अस्पताल आने वाले मरीजों निजी केंद्रों पर महंगी जांच कराने को विवश हैं।
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मरीजों ने बयां किया दर्द...
केस: 1
मूल रूप से सिलथम निवासी लालवर्ती (65) ने बताया कि एक महीने से अस्पताल में भर्ती हूं। पैर में राॅड डालने के लिए शुक्रवार को ऑपरेशन होना था। मगर नहीं हो सका। कोई यह नहीं बता रहा ऑपरेशन कब होगा।
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केस:2
पन्नूगंज थाना क्षेत्र के भैयालाल ने बताया कि दस दिन से भर्ती हैं। आंख के पास नस कटी है। शुक्रवार को ऑपरेशन होना था, मगर तीन दिन से डॉक्टर देखने ही नहीं आए हैं।
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केस:3
करमा के मगरदहा निवासी नंदलाल ने बताया कि 14 अगस्त से भर्ती हैं। आयुष्मान और लाल कार्ड है, लेकिन शुक्रवार से दवा काउंटर से दवा नहीं मिल रही है। कुछ दवाएं बाहर से ली। कोई डाॅक्टर नहीं देख रहा। उल्टी की शिकायत पर सुबह से नमक पानी पी रहा हूं।
केस:4
रामपुर बरकोनिया थाना क्षेत्र निवासी बेड पर मौजूद कमलेश और कौशल ने बताया कि हाथ टूटा है। उन्हें छुट्टी भी मिल गई है। शुक्रवार से काउंटर से दवा नहीं मिल रही है। दोनों ने चार-चार हजार की दवा निजी दुकान से ली है।
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हड़ताल पर गए रेजिडेंट डॉक्टरों से काम पर लौटने की अपील की जा रही है। अस्पताल आने वाले मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसका ध्यान दिया जा रहा है। वरिष्ठ चिकित्सकों को जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। हालात पर नजर है। -प्रो.एसके सिंह, प्राचार्य मेडिकल काॅलेज।