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एक तरफा कोशिश पर करेंगे राष्ट्रव्यापी हड़ताल

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अनपरा । नेशनल को-आर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिक सिटी इंपलाईज एंड इंजीनियर्स ने संसद के बजट सत्र में इलेक्ट्रिक सिटी अमेंडमेंट बिल 2014 पारित करने की एकतरफा कोशिश करने पर राष्ट्रव्यापी हड़ताल की चेतावनी दी है। कहा है कि देश के लगभग 25 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर विरोध स्वरूप उसी दिन से हड़ताल व कार्य बहिष्कार करेंगे। चेयरमैन शैलेन्द्र दूबे ने बताया कि प्रधानमंत्री को दो मार्च को संगठन ने इस बावत पत्र भेज दिया है। जिसमें कहा गया है कि 14 मार्च को राज्यों की राजधानियों में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अलावा तीन अप्रैल को दिल्ली में विशाल रैली की जाएगी। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक सिटी अमेंडमेंट बिल के जनविरोधी प्रतिगामी प्राविधानों का प्रारम्भ से ही विरोध हो रहा है। बताया कि केंद्रीय विद्युत मंत्री आरके सिंह से वार्ता करने की कोशिश का कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला। पता चला है कि संसद के बजट सत्र के द्वितीय चरण में इस बिल को पारित कराने की कोशिश हो रही है । जिससे बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों में भारी गुस्सा है । उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक सिटी अमेंडमेंट बिल में बिजली वितरण और विद्युत आपूर्ति के लाइसेंस अलग-अलग करने तथा एक ही क्षेत्र में कई विद्युत आपूर्ति कंपनियां बनाने का प्राविधान है । बिल के अनुसार सरकारी कंपनी को सबको बिजली देने की अनिवार्यता होगी जबकि निजी कंपनियों पर ऐसा कोई बंधन नहीं होगा । स्वाभाविक है कि निजी आपूर्ति कंपनियां मुनाफे वाले बड़े वाणिज्यिक और औद्योगिक घरानों को बिजली आपूर्ति करेंगी जबकि सरकारी क्षेत्र की बिजली आपूर्ति कंपनी निजी नलकूप, गरीबी रेखा से नीचे के उपभोक्ताओं और लागत से कम मूल्य पर बिजली टैरिफ के घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति करने को विवश होगी और घाटा उठाएगी। उन्होंने कहा कि निजी घरानों पर अति निर्भरता की गलत ऊर्जा नीति का ही नतीजा है कि बिजली वितरण कंपनियों का घाटा और कर्ज नौ लाख करोड़ से अधिक हो गया है जो इलेक्ट्रिक सिटी ऐक्ट 2003 बनते समय मात्र 30 हजार करोड़ था ।
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