दुद्धी। तहसील परिसर में चल रही रासलीला में शुक्रवार की रात अत्याचारी कंस के वध का मंचन किया गया। यहां कलाकारों ने अत्याचारी कंस के विभिन्न कृत्यों के मंचन के साथ ही भगवान श्री कृष्ण की लीला का भी शानदार मंचन कर श्रद्घालुओं को मन मोह लिया। व्यास पंडित कृष्ण मुरारी ने कृष्ण लीला के बारे में बताया। यहां कलाकारों ने मंचन किया कि जब कंस को यह भरोसा हो गया कि श्रीकृष्ण ही उसके परम शत्रु हैं तो उसने श्रीकृष्ण को मारने का बहुत उपाय किया। लेकिन जब कोई सफलता नहीं मिल पाई तो उसने एक योजना के तहत श्रीकृष्ण व बलराम को अपने राजमहल बुलाया। प्रभु भी इस बात को जान गए कि कंस का अंत समय आ गया है और उन्हें उसका वध करना है। इसी कारण भगवान श्रीकृष्ण अपने बड़े भाई बलराम के साथ मथुरा के लिए चल देते हैं। ब्रज से कंस के राजमहल के बीच भगवान श्रीकृष्ण ने अक्रुरजी को ज्ञान दिया व रजक धोबी, माली, दर्जी, हाथी सहित कई का उद्धार भी किया। फिर दोनों भाइयों ने कंस के सारे अभिमान को चूर किया। श्रीकृष्ण ने अपने एक ही प्रहार से अत्याचारी कंस का अंत कर दिया। अंत मे आरती से पूर्व आयोजन समिति के संरक्षक डॉ. राजकिशोर सिंह ने सभी के प्रति आभार जताया। यहां चैयरमेन राजकुमार अग्रहरि, कन्हैया लाल, आलोक कुमार, दसई राम, दिनेश चंद, दिनेश आढ़ती, राजू कसेरा मौजूद रहे।