ओबरा। अग्नि में विधिपूर्वक दी गई आहुतियां देवताओं को मिलती हैं। जिससे देवता प्रसन्न होकर राष्ट्र का मंगल करते हैं। यह बातें अखिल सनातन धर्म के मुख्य स्तंभ श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने सेक्टर आठ स्थित शनिदेव मंदिर के प्रांगण में सप्त दिवसीय मिर्चन यज्ञ के अवसर पर अपने प्रवचन में कही। उन्होंने कहा कि विधि पूर्वक किया गया हवन कलयुग में कल्पवृक्ष के समान है, जिससे हम मनोवांछित फल की प्राप्ति कर सकते हैं। जबकि विधि के विरूद्घ किया गया यज्ञ विनाश का कारण बनता है। प्राचीन काल से ही यज्ञ शक्ति के स्त्रोत रहे हैं। देवता ही नहीं बल्कि राक्षस भी अपनी शक्तियों में वृद्धि करने के लिए यज्ञ किया करते थे। हम अपनी संस्कृति और सभ्यताओं से दूर होते जा रहे हैं। अपनी पद्घतियों के विस्मृति का दुष्परिणाम पूरा समाज भुगत रहा है। शनि पीठाधीश्वर अनंत विभुषित बालयोगेश्वरानंद स्वामी शनिदेव महराज ने कहा कि रोग, दोष, शोक, अकाल मृत्यु एवं गृह बाधा निवारण के लिए मिर्चन यज्ञ का आयोजन किया गया है। यहां महानिमार्णी अखाड़ा से परशुराम महाराज, जुना अखाड़ा से नागादास महाराज, दिगंबर अखाड़ा से महंथ भगवानदास, कथावाचिका जावित्री पांडेय, त्यागी महाराज, बृजभूषण का आशीर्वचन श्रद्धालु भक्तों को प्राप्त हुआ। इस दौरान नगर पंचायत अध्यक्ष प्रानमती देवी, संजय बैसवार, धुरंधर शर्मा, आशुतोष सिंह, आलोक पांडेय, कमलेश उपाध्याय, प्रमोद शुक्ल, रामप्यारे सिंह, रवि प्रकाश चौबे, संतोष पांडेय, विट्टन सिंह, कुश अग्रहरि, श्यामरथी, आचार्य संतोष, राजेंद्र मौजूद रहे।