वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर हिन्दुआरी में तिराहा से पहले बने ब्रेकर पर बना बड़ा गड्ढा। -संवाद।
सोनभद्र। महंगा टोल देने के बाद भी वाराणसी-शक्तिनगर राजमार्ग पर राहगीरों को सुरक्षित सफर मयस्सर नहीं है। खराब सड़क और सुरक्षा इंतजामों की कमी के चलते आए दिन हादसों में लोग जान गंवा रहे हैं। जिले में पिछले 80 महीने में हुए 2630 सड़क हादसों में 1888 लोगों की जान गई है। इन हादसों में 1658 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। आधे से ज्यादा हादसे स्टेट हाईवे पर ही हुए हैं। बावजूद इसके जिम्मेदार बेपरवाह हैं। कुल 115 किमी लंबे स्टेट हाईवे का 80 किमी हिस्सा सोनभद्र की सीमा में है। पूर्वांचल की मंडियों तक गिट्टी, बालू, कोयला का परिवहन इसी सड़क से होता है। ओवरलोड माल का परिवहन करने वाले वाहनों से टोल कंपनी को मोटी कमाई भी होती है, मगर उस अनुपात में सड़कों की देखरेख पर खर्च नहीं किया जाता। नतीजा, जहां सड़क धंसती और दबती है तो फिर उसी हाल में महीनों तक रहती है। गड्ढे भी समय पर नहीं भरे जाते और न ही मरम्मत का अन्य कार्य मानक के अनुरूप होता है। क्षतिग्रस्त सड़क पर चलने का खामियाजा आम राहगीरों को हादसे का शिकार बनकर चुकाना पड़ता है। गड्ढों में लड़खड़ाने, ब्रेकर पर उछलने, सड़क पर फैले गिट्टी-बालू पर फिसलने और दबी सड़क पर असंतुलित होने से बाइक और चार पहिया सवार दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। पूरी सड़क को बेहतर बनाना तो दूर अक्सर होने वाले हादसों के आधार पर यातायात पुलिस की ओर से चिह्नित किए गए ब्लैक स्पॉट पर भी समुचित सुधारात्मक कार्य नहीं कराए जा रहे। हिंदुआरी तिराहा पिछले कई वर्षों से लगातार ब्लैक स्पॉट बनता आ रहा है। तीव्र घुमावदार मोड़ होने के कारण यहां हर साल हादसे होते हैं। हाईवे की पश्चिमी लेन पर बेलन नदी का पुल पार करने के बाद तिराहे से 50 मीटर पहले ब्रेकर बनाया गया है। आधी सड़क पर तो ब्रेकर है, लेकिन शेष हिस्से में ब्रेकर धंसकर करीब छह इंच गहरा और डेढ़ फीट चौड़ा गड्ढा बन गया है। आसपास छोटे-छोटे कई और गड्ढे हैं। ब्रेकर से पहले सफेद पट्टी या संकेतक भी नहीं है। नतीजा तेजी से आने वाले वाहन गड्ढे में जाकर अनियंत्रित हो जाते हैं। हिंदुआरी तिराहे से पहले बिच्छी पड़ाव भी दुर्घटना बहुल क्षेत्र है। यहां यातायात पुलिस की ओर से दुर्घटना बहुल क्षेत्र होने का बोर्ड भी लगा है, लेकिन एक तरफ बोर्ड पर लिखा संदेश मिट गया है तो दूसरी तरफ डिवाइडर की ऊंची झाड़ियों से वह स्पष्ट नजर नहीं आता। यहां रेडियम पट्टी भी नहीं दिखती। इसी जगह सड़क के दोनों तरफ से गांवों का संपर्क मार्ग है। इसके लिए भी कोई संकेतक या सड़क पर क्रॉसिंग के निशान नहीं लगे हैं। लिहाजा गांव की सड़क से निकलकर लोग पूरी स्पीड से सीधे हाईवे पर आ जाते हैं।