करमा। मानव रहित रेलवे फाटक पर कई घटनाओं के बाद भी रेलवे व स्थानीय प्रशासन कितना गंभीर है, यह करमा थाना क्षेत्र में देखा जा सकता है। यहां रेलवे विभाग की एक चूक लोगों के लिए मुसीबत बन गई है। रेलवे विभाग ने करमा स्थित घोरावल राजवाहा पर बने रेलवे फाटक को इसलिए समाप्त कर पिलर गाड़ दिया क्योंकि पूर्व में फाटक की देखरेख सिंचाई विभाग का एक कर्मचारी किया करता था। बाद में सिंचाई विभाग के कर्मचारी के हटते ही लगा रेलवे फाटक भी हटा लिया गया और उसी स्थान पर रेलवे ने पिलर गाड़ दिया। अब आलम यह है कि मानव रहित इस फाटक को पार कर दर्जनों गांवों से काफी संख्या में लोग आते व जाते हैं। स्कूल के दिनों में बच्चे भी इसी ट्रैक को पार कर आते-जाते हैं। यदि अन्य मार्ग का सहारा लेना हो तो लोगों को कई किमी दूर घूम कर आना पड़ता है, जिसमें अधिक समय लगने के साथ ही अन्य परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। बता दें कि करमा स्थित घोरावल राजवाहा पर बना रेलवे फाटक नहीं खुलने से लोगों में रोष व्याप्त है। अंग्रेजों के समय से करमा आमजन के आवागमन का एकमात्र सुलभ मार्ग था। इसे करीब छह वर्ष पूर्व रेलवे विभाग ने बंद कर दिया। इसके बाद इस मार्ग को खुलवाने के लिए स्थानीय लोग डीएम से लेकर सांसद, विधायक व रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा से भी गुहार लगा चुके हैं, लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। करमा में प्रस्तावित ब्लॉक के साथ, थाना, को-ऑपरेटिव ए पीएचसी और कई इंटर कॉलेज भी हैं, जहां प्रतिदिन काफी संख्या में लोगों को इसी रास्ते से आना जाना होता है। क्षेत्रीय लोगों ने डीएम का ध्यान आकृष्ट करते हुए रेलवे फाटक को यथाशीघ्र खुलवाने की मांग की है।