सोनभद्र। बुजुर्गों का मानना है कि पहले और आज के चुनाव में काफी अंतर आ गया है। पहले प्रत्याशी लोगों के घर-घर पहुंच कर मतदान करने की अपील करते थे। लेकिन अब उम्मीदवार एक जगह बैठकर लोगों को अपने पक्ष में मतदान करने की अपील करते हैं। इतना ही नहीं पूर्व में लोग उन्हें चंदा देकर चुनाव लड़ने में मदद करते थे। लेकिन अब अधिकांश उम्मीदवार जीत के लिए पानी की तरह रुपये खर्च कर रहे हैं। राबर्ट्सगंज ब्लॉक के तरावा गांव निवासी मारकंडेय देव का कहना है पहले प्रत्याशियों का चयन का पैमाना उनकी योग्यता होती थी। लेकिन अब जातीय गुणा गणित आधार पर उम्मीदवारी तय की जा रही है। रामेश्वर देव पांडेय कहते हैं कि पहले साफ-सुथरे लोगों को राजनीति में आने दिया जाता था। अब उनकी जगह अपराधियों और दागदार छवि वालों ने ले ली है। ममुआ गांव निवासी रघुनाथ ने कहा कि पहले राजनीतिक पार्टियां जिले स्तर के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं से किसको चुनाव लड़ाया जाए, इस बारे में राय लेती थी। लेकिन अब ऐसा किसी दल में नहीं रह गया है। पार्टियां किसी को भी उम्मीदवार बना दे रही है। हरिहरपुर गांव निवासी विशेश्वर मिश्रा का कहते हैं कि पहले आपराधिक प्रवृत्ति के लोग चुनाव नहीं लड़ते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं रह गया है।