मधुपुर के तकिया प्राथमिक विद्यालय में हैंडपंप से निकला गंदा पानी को दिखाता छात्र।
जिले में गर्मी के दस्तक देते ही पेयजल की किल्लत शुरू हो गई है। सदर और घोरावल तहसील के 132 गांवों के अधिकांश हैंडपंपों ने जवाब दे दिया है। कुओं और तालाबों में नाममात्र का पानी बचा है। ऐसे में ग्रामीणों के सामने पेयजल की समस्या खड़ी हो गई है। इससे निबटने के लिए जल निगम ने 165 टैंकरों की व्यवस्था कर ली हैै। जल निगम ने पहले चरण में 25 गांवों में टैंकरों से पानी की आपूर्ति शुरू कर दी हैै।
सूबे के एक छोर पर बसे अति नक्सल प्रभावित जिले का अधिकांश क्षेत्रफल पहाड़ों एवं वनों से घिरा है। यहां की सर्वाधिक आबादी पहाड़ी इलाकों में निवास करती है। गर्मी के दिनों में शुरू से ही पानी का संकट बना रहा है। पेयजल मुहैया कराने के लिए जिले में इंडिया मार्का के करीब 35000 हैंडपंप लगे हैं। लेकिन वर्तमान में 132 गांवों के करीब तीन हजार से अधिक हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है।
इन गांवों में स्थित कूपों और तालाबों में भी नाममात्र का पानी बचा है। इससे ग्रामीणों के समक्ष पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है। जल निगम के अधिशासी अभियंता राकेश कुमार बंसल कहते हैं कि गर्मी के दिनों में पानी की समस्या को देखते हुए विभागीय और निजी मिलाकर 165 टैंकर आपूर्ति के लिए रखे गए हैं। बताया कि वर्तमान में सदर ब्लॉक के उरमौरा, लोढ़ी, चुर्क, रौप, बहुआर, बसौली, गोरारी, सहिजन खुर्द, बिचपई, सिंधोरा, भडऱा खुर्द, मुठेर, कमोजी, कम्हारी, निपराज, घोरावल ब्लॉक केे शिव मंदिर और दुगौलिया और चोपन ब्लॉक के बडग़वां समेत लगभग 25 गांवों में टैंकरों से पानी की आपूर्ति शुरू करा दी गई है। पेयजल समस्या के लिए चिह्नित 132 गांवों में से जहां सबसे अधिक पानी की समस्या है, वहां वरीयता के आधार पर पानी आपूर्ति कराने का प्रबंध किया जा रहा है।