सोनभद्र। बदलते परिवेश में संसाधनों में बढ़ोत्तरी के साथ ही चुनावी प्रचार का तरीका भी तेजी से बदल रहा है। कभी प्रत्याशी चुुनाव में जीत के लिए घर-घर जाकर आशीर्वाद मांगते थे, लेकिन अब घर-घर कंवेंसिंग नहीं होती। पहले विकास मुद्दा होता था, लेकिन अब एक-दूसरे पर व्यक्तिगत आक्षेप लगाकर ही वोट मांगे जाते हैं। अब घर-घर जाकर वोट मांगने की परंपरा विलुप्त हो रही है। राजनीति का स्तर काफी हद तक नीचे गिरा है। वरिष्ठ साहित्यकार अजय शेखर का कहना है कि पहले लोग चुनाव नि:स्वार्थ भाव से चुनाव लड़ते थे। उनके चुनाव प्रचार का तरीका भी अलग होता था। लौंग लेकर प्रत्याशी घर-घर जाता था और लौंग देकर आशीर्वाद के रूप में वोट मांगता था। तब राजनीति का स्तर इतना नहीं गिरा था। यदि प्रत्याशी एक दूसरे के सामने आते थे, तो भाईचारे के साथ मिलते थे। अब आमना-सामना होने पर ऐसा व्यवहार होता है जैसे चुनाव नहीं लड़ रहे, पुरानी दुश्मनी निकाल रहे। अब हाईटेक होते जमाने में प्रत्याशी का कार्य व्यवहार भी काफी हद तक बदल गया है। इमरती कॉलोनी निवासी बलवीर कोहली कहते हैं कि अब घर-घर कंवेंसिंग नहीं होती। चुनाव के समय ही नेता नजर आते हैं। फिर उनका संपर्क खत्म हो जाता है। पहले सिर्फ विकास नारा होता था। अब सिर्फ नेता एक-दूसरे की बुराई करते हैं। दूसरों की कमियों को देखते है। कोई एजेंडा अब प्रत्याशी नहीं लेकर चलते हैं। आम जनता के विषय में गंभीर नहीं होते। सिर्फ नारों और वादों तक सिमट जाते हैं। इसलिए हम लोगों को सोच समझ कर वोट देना चाहिए।