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रजिस्ट्रेशन के बावजूद धान खरीद न होने से किसान परेशान

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म्योरपुर। ब्लॉक के किसानों में धान की पैदावार को बेचने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। रजिस्ट्रेशन के बावजूद धान की फसल घर पर पड़ी हुई है। इससे किसानों में नाराजगी व्याप्त है। किसानों ने तत्काल उनके धान की फसल की खरीदी कराने की मांग की है। म्योरपुर के विभिन्न गांवों में इस वर्ष धान की अच्छी पैदावार किसानों द्वारा की गई है। पैदावार बेचने के लिए किसान काफी उत्साहित थे कि उनको अच्छे दर पर सरकार द्वारा खोले गए धान क्रय केंद्रों में बेचकर लाभ मिल जाएगाए लेकिन उनकी आशा अधूरी ही रह गई। धान खरीद के लिए किसानों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया और इसके बाद लेखपाल द्वारा सत्यापन भी किया गया। किसानों के मुताबिक लेखपाल द्वारा पैदावार के सापेक्ष उनके जमीन होने की सत्यता की जांच की और धान बेचने के लिए रिपोर्ट भी लगा दी। इसके बावजूद किसान धान बेचने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। किसानों का कहना है कि उनको धान क्रय केंद्र पर जाने पर पता चला कि 28 जनवरी तक ही खरीद की गई है। इसके पूर्व भी किसानों को बोरा न होने और गोदाम में जगह न होने की बात कह कर टाल दिया जाता था। अब धान की फसल उनके घर पर पड़ी हुई है। किसानों का कहना है कि सरकारी खरीद से वंचित होने के बाद वह ओने पौने दामों पर अपनी धान की फसल बेचने के लिए मजबूर हैं। इस संबंध में म्योरपुर के धान क्रय केंद्र के प्रभारी विनोद ने बताया कि धान खरीद 28 जनवरी तक हुई है। ऐसे में अब धान खरीद पाना संभव नहीं है। जिला प्रबंधक ने बताया कि धान खरीद का लक्ष्य पूरा हो जाने से खरीद बंद कर दी गई है। खाद्य विभाग द्वारा भी बचे हुए किसानों की धान की खरीद की जा रही है। किसान खाद्य विभाग के अधिकारियों से मिलकर अपनी धान की फसल बेच सकते हैं। उधर केकराही: किसान सेवा सहकारी समिति करमा क्रय केंद्र पर किसानों का महीने भर पहले का लाया गया धान अब तक नही खरीदा गया। किसान घनश्याम मौर्य, शिवकुमार, कमलेश, प्रभुपाल, राजेंदर चौहान, पप्पू ने बताया की उनका धान करमा क्रय केंद्र पर बेचने के लिए 20 जनवरी, 22 जनवरी से ही लाया गया है। अभी तक खरीद नहीं की गई है। खरीद 28 जनवरी से ही बंद कर दी गई है। उधर, सचिव विनोद कुमार मौर्य ने बताया कि उन्हें अब खरीद का कोई आदेश नहीं मिला है।
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