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गोस्वामी तुलसीलदास ने किया है 16 संस्कारों का वर्णन

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चोपन। नगर के रेलवे दुर्गा मैदान में चल रहे श्री राम कथा में पांचवे दिन श्रीराम की बाल लीलाओं की कथा हुई। कथावाचिका राजराजेश्वरी देवी ने संस्कार पर चर्चा की। कहा, संस्कार अर्थात सद्गुणों को गुणा करना अर्थात बढ़ाना एवं दोषों का भागफल अर्थात दोषों को घटाना होता है। संस्कार शब्द का अर्थ है शुद्धीकरण। जीवात्मा जब एक शरीर को त्याग कर दूसरे शरीर में जन्म लेती है तो उसके पूर्व जन्म के प्रभाव उसके साथ आ जाते हैं। इन प्रभावों का वाहक सूक्ष्म शरीर होता है, जो जीवात्मा के साथ एक स्थूल शरीर से दूसरे स्थूल शरीर में जाता है। बच्चा भले और बुरे प्रभावों को लेकर नए जीवन में प्रवेश करता है। संस्कारों का उद्देश्य है कि पूर्व जन्म के बुरे प्रभावों का धीरे-धीरे अंत हो जाए और अच्छे प्रभावों की उन्नति हो। संस्कार के दो रूप हैं एक आंतरिक रूप और दूसरा बाह्य। बाह्य रूप का नाम रीति रिवाज है। यह आंतरिक रूप की रक्षा करता है। मानस में गोस्वामी तुलसीदास ने सोलह संस्कारों का वर्णन किया है जो श्री राम में घटित होते हैं। महाराज दशरथ ने अपने चारों बालकों का 16 संस्कार किया है। इस दौरान उमेश सिंह, प्रदीप अग्रवाल, सुनील सिंह, संजय जैन, सत्यप्रकाश तिवारी, संजय चेतन, विनोद कुमार, आशीष श्रीवास्तव मौजूद रहे।
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