सोनभद्र। अपनी रचनाओं में मानव जीवन के यथार्थ का बोध कराने वाले महाकवि निराला की जयंती रविवार को विविध आयोजनों के साथ मनाई गई। मधुरिमा साहित्य गोष्ठी की तरफ से लगातार 59वें वर्ष राबटर्सगंज में काव्य गोष्ठी और परिचर्चा आयोजित कर सूर्यकांत त्रिपाठी निराला को याद किया गया। मौजूद लोगों ने निराला के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्य वक्ता अजयशेखर ने शोरूम में पड़ा तुम्हारा अस्तित्व मुझ जैसा कोई भी खरीद सकता है, पर मेरी सड़कों की आवारगी तुम्हारी हैसियत के बाहर की चीज है.. से निराला के व्यक्तित्व की ऊंचाई बयां की। कहा कि वह मानववादी थी। वह तोड़ती पत्थर, इलाहाबाद के पथ पर... रचना इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। उनकी रचनाओं में लोगों के दुख-दर्द की झलक तो मिलती ही है, यथार्थ का भी बेबाकी से बोध कराती है। चंद्रकांत शर्मा ने वरदे वीणावादिनी वर दे का स्वरचित काव्यपाठ किया। कथाकार रामनाथ शिवेंद्र ने निराला को लोहिया को साम्यवाद को जोड़ते हुए अद्वितीय साहित्यकार और चिंतक बताया। काबिल मिर्जापुर ने उनके जीवन चरित आधारित कविता पढ़ी। राष्ट्रपति पुरस्कृत अर्जुनदास केशरी ने लोहिया और निराला से जुड़े संस्मरण सुनाए और उनका संबंध देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद और पीएम जवाहरलाल नेहरू से जोड़ते हुए व्याख्यान दिया। एडवोकेट प्रद्युम्न तिवारी ने भारती के भाल का श्रृंगार तिरंगा, विश्व कांपता जिससे वह ललकार तिरंगा..., अरूण त्रिपाठी ने भारत का भाल चमकता रहेगा..., अशोक तिवारी ने रब से बेगाने मजहब के दिवाने निकले.. कविता पढ़ी। पंथी ने लोकभाषा में निराला पर आधारित गीत सुनाया। अब्दुल हई, ईश्वर बिरागी ने भी निराला के व्यक्तित्व को वर्णित करती कविता पढी। राष्ट्रपति पुरस्कृत ओमप्रकाश त्रिपाठी, पूर्व चेयरमैन कृष्णमुरारी गुप्ता, गोपाल पाठक, दीपक केशरवानी, भोलानाथ मिश्रा, राकेश शरण मिश्र, आशुतोष पांडेय आदि मौजूद रहे।