विंढमगंज। वर्षों से विकलांगता बांट रहे फ्लोरोसिस ने मंगलवार को एक और युवक की जिंदगी छीन ली। नए साल के पहले दिन हुई मौत ने जहां पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। वहीं रोहनियादामर और इससे सटे गोबरदह, कुड़वा में बीस दिन में सात की मौत ने हड़कंप मचा रखा है। वहीं दस से अधिक लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है। जिले में बीस वर्ष पूर्व जब फ़्लोरोसिस से गंभीर रूप से प्रभावित गांवों का चयन किया गया था, तब सबसे पहले रोहनियादामर, कुड़वा, गोबरदह एरिया का नाम सामने आया था। तब से अब तक यहां कई लोग फ्लोरोसिस की भेंट चढ़ चुके हैं। मंगलवार को भी जब लोग नए साल का जश्र मनाने की तैयारी में जुटे हुए थे, तभी फ्लोरोसिस से पीड़ित गांव के 55 वर्षीय झगडू़ राम की सांसें थम गईं। कुछ दिन पूर्व यहां के नरेश धांगर की भी फ्लोरोसिस के चलते मौत हो गई थी। अभी उनकी तेरहवीं भी नहीं बीती एक और मौत ने पूरे गांव में मातम की स्थिति बना दी। इससे पहले रोहनियादामर से सटे गिांव कुड़वा के अवधेश चेरो (49), मंगरू धागर (31), गजाधर भुइया (29), गोबरदह गांव के भगत चेरो (49), कुसमरिया (50) की मौत महज 20 दिन के भीतर हो चुकी है। इससे जहां ग्रामीणों में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं सरकारी तंत्र की उदासीनता उन्हें नाराज किए हुए है। रोहनियादामर केसीताराम आदि ग्रामीणों का कहना है कि गांव और आस-पास में दर्जनों लोग फ़्लोरोसिस की चपेट में आकर अपाहिज की जिंदगी जी रहे हैं। एक-एक कर मौत भी हो रही है। बताया कि इस समय किसमतिया (45) पत्नी सीताराम, पन्ना (42), सुनैना (40) पत्नी चिरंजीव, नानू (41), धनगर (43), सरजू धां गर की 45 वर्षीय पत्नी, शिवधारी धनगर (37),जमुना पासवान की पत्नी, रामदास (50), अनरवा (55) पत्नी मनी भुइयां, मुखमन (35) की हालत गंभीर बनी हुई है। कोई कमर तो कोई पैर से अपाहिज है, तो कई लोग कमर-पैर दोनों से अपाहिज होकर बिस्तर पर पड़े हुए हैं। कुड़वा की प्रधान शांति देवी कहती हैं कि फ्लोरोसिस प्रभावित गांवों में कैंप लगाकर पीड़ितों के इलाज की मांग लगातार की जाती है। बावजूद पिछले छह माह से एक भी चिकित्सा कैंप गांव में नहीं लग सका है। शुद्ध पेयजल उपलब्धता को लेकर भी अभी आश्वासन ही दिया जा रहा है।