सोनभद्र। सड़क हादसों को रोकने के लिए चलाए जा रहे तमाम जागरुकता कार्यक्रमों के बावजूद लोग मानने को तैयार नहीं है। बिना हेलमेट, सीट बेल्ट और तेज गति से सड़कों पर वाहन दौड़ाने का अंजाम बढ़ती दुर्घटनाओं के रूप में सामने है। आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले तीन साल में जिले की सड़कों पर 1115 हादसों में 818 लोगों की जान गई है। इसके अलावा 704 लोग गंभीर घायल भी हुए हैं। विडंबना है कि 70 प्रतिशत हादसों में हेलमेट न पहनना और तेज गति कारण बना है।
चार राज्यों से सटे जिले की सड़कों पर भारी वाहनों का आवागमन हर वक्त रहता है। वाहन पर सवार होने के बाद मंजिल तक पहुंचने की जल्दी में लोगों को न तो ट्रैफिक नियम याद आते हैं और न ही वाहन की गति नियंत्रित रहती है। तेज गति में सड़कों पर दौड़ते दो पहिया-चार पहिया वाहनों के अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त होने की स्थिति में बड़ी क्षति होती है। अधिकांश हादसों में घायल होने वाले अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ते हैं। इसकी वजह उनके सिर और सीने में गंभीर चोट आना होता है। डॉक्टरों के मुताबिक शरीर के यह दाेनों अंग बेहद संवेदनशील होते हैं। हड्डी में आई चोट ठीक होने की गुंजाइश रहती है, सिर और सीने में आई चोट घातक होती है। ऐसे मामलों में बचने की उम्मीद कम होती है।
ट्रैफिक नियमाें का नहीं करते पालन
सड़क हादसों के पीछे सड़क पर चलने की सामान्य जानकारी का अभाव भी एक प्रमुख वजह है। हाईवे पर चलने के दौरान कई बार लोग दूसरी पटरी में जाने के लिए पूरे डिवाइडर को पार करने की बजाय अवैध कट का इस्तेमाल करते हैं। राबर्ट्सगंज से सुकृत के बीच करीब 15 स्थानों पर लोगों ने अवैध कट बना रखे हैं। ऐसे में अपनी दिशा से चल रहे वाहन अचानक सामने से दूसरा वाहन आने पर अनियंत्रित हो जाते हैं। पैदल चलने के दौरान भी लोग सही दिशा का ध्यान नहीं रखते। ईयरफोन और मोबाइल पर बात करते हुए भी ड्राइविंग हादसों का कारण बन रही हैं। प्रतिवर्ष 20-25 प्रतिशत घटनाएं सिर्फ इन वजहों से हो रही हैं।
जिले में 15 ब्लैक स्पॉट, कई अभी सूची में नहीं
सड़क हादसों की संख्या के आधार पर जिले में कुल 15 ब्लैक स्पॉट चिह्नित हैं। इसमें चंडी तिराहा, मारकुंडी घाटी, पटवध, चोपन बैरियर, बग्घानाला, हाथीनाला, तुर्रा मोड़ सहित अन्य स्थान हैं। सबसे ज्यादा हादसे इन्हीं स्थानों पर हुए हैं। अभी भी कई स्थल इस सूची में शामिल नहीं हैं। इसके अलावा चिह्नित स्थानों पर भी दुर्घटनाओं को टालने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। सिर्फ दुर्घटना बहुल क्षेत्र का बोर्ड लगाकर इतिश्री की गई है।
गोल्डेन ऑवर में नहीं मिल पाता उपचार
इसी साल अप्रैल में हुई जिला यातायात समिति की बैठक में दुर्घटनाओं की ऑडिट में सामने आया था कि हादसों में घायल हाेने वालों को तत्काल बेहतर उपचार नहीं मिल पाता। जिले में हाईवे पर स्थित अस्पतालों में न तो ट्रामा के विशेषज्ञ चिकित्सक हैं और न ही जरूरी उपकरण। नतीजा अधिकांश मामलों में मरीज को वाराणसी रेफर किया जाता है, जहां तक पहुंचने से पहले ही मौत हो जाती है।
हर साल बढ़ रही सड़क हादसों की संख्या:
वर्ष: हादसे: मौत: घायल
2021: 348: 268: 229
2022: 386: 279: 252
2023: 381: 271: 223
(नोट: वर्ष 2023 के आंकड़े जनवरी से 15 नवंबर तक हैं।)
जिले की सड़कों पर बढ़ते हादसों के पीछे यातायात नियमों की अनदेखी प्रमुख कारण है। हाईवे पर गलत दिशा से चलने, तेज गति, अवैध कट पार करने जैसी गलतियाें के कारण दुर्घटनाएं हो रही हैं। ज्यादातर मामलों में हेलमेट और सीट बेल्ट न होने के कारण मौत हो रही है। लगातार अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। नियम न मानने वालों पर कार्रवाई भी की जा रही है। - अमित सिंह, यातायात निरीक्षक, सोनभद्र।
जिले की सड़कों पर बढ़ते हादसों के पीछे यातायात नियमों की अनदेखी प्रमुख कारण है। हाईवे पर गलत दिशा से चलने, तेज गति, अवैध कट पार करने जैसी गलतियाें के कारण दुर्घटनाएं हो रही हैं। ज्यादातर मामलों में हेलमेट और सीट बेल्ट न होने के कारण मौत हो रही है। लगातार अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। नियम न मानने वालों पर कार्रवाई भी की जा रही है। - अमित सिंह, यातायात निरीक्षक, सोनभद्र।