ओबरा क्षेत्र के रेणुका नदी में फसे लोग।स्रोत जागरूक पाठक
ओबरा (सोनभद्र)। नगर पंचायत के सेक्टर तीन स्थित रेणुका छठ घाट पर सोमवार की शाम बड़ा हादसा होते-होते बच गया। रेणुका घाट घूमने पहुंचे 11 लोग ओबरा बांध से अचानक पानी छोड़े जाने के कारण बीच धारा में मौजूद टापू पर फंस गए। नदी में लगातार बढ़ते तेज बहाव के कारण उनकी सांसें अटकी रहीं। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से करीब दो घंटे बाद सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। सभी लोग दिल्ली और ओबरा के निवासी बताए गए हैं। ओबरा पुलिस के मुताबिक दिल्ली से रिश्तेदारी में आए कुछ लोग बच्चों के साथ सोमवार शाम रेणुका छठ घाट घूमने पहुंचे थे। उस समय नदी में पानी का स्तर कम होने के कारण सभी लोग तस्वीरें खींचने और सेल्फी लेने के लिए बीच नदी में बने टापू तक चले गए। इसी दौरान शाम करीब छह से साढ़े छह बजे के बीच ओबरा डैम से पानी छोड़ दिया गया। कुछ ही मिनटों में नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा और टापू चारों ओर से पानी से घिर गया। किनारे पर मौजूद लोगों ने पानी बढ़ता देख टापू पर फंसे लोगों को आवाज लगाकर बाहर आने को कहा लेकिन तब तक बहाव काफी तेज हो चुका था। कुछ लोग तो समय रहते बाहर निकल आए लेकिन 11 लोग बीच धारा में ही फंस गए और मदद की गुहार लगाने लगे। सूचना पर ओबरा थाना प्रभारी सदानंद राय ने तत्काल डैम प्रबंधन से संपर्क कर पानी छोड़ने पर रोक लगवाई। इसके बाद भी नदी का बहाव तेज होने के कारण फंसे लोगों को कुछ समय तक टापू पर ही इंतजार करना पड़ा। मौके पर पीआरवी-112, थाने की पुलिस और क्राइम इंस्पेक्टर भी पहुंच गए। जलस्तर कम होने पर नगर पंचायत के सभासद अजीत कनौजिया, स्थानीय युवकों और पुलिस टीम के संयुक्त प्रयास से सभी 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। सभी के सुरक्षित निकलने पर प्रशासन और परिजनों ने राहत की सांस ली। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेणुका छठ घाट पर पहले भी अचानक पानी बढ़ने से कई हादसे हो चुके हैं और लोगों की जान जा चुकी है। घाट पर पर्याप्त चेतावनी बोर्ड न होने से लोग कम पानी देखकर नदी में उतर जाते हैं। डैम से पानी छोड़े जाने पर कुछ ही मिनटों में जलस्तर बढ़ जाता है और तेज बहाव के कारण बाहर निकलने का मौका नहीं मिल पाता। लोगों ने घाट पर चेतावनी बोर्ड लगाने और सुरक्षा के स्थायी इंतजाम कराने की मांग की है।