सोनभद्र। मौसम बदलने के साथ ही लोग विभिन्न प्रकार की बीमारियों के चपेट में आने लगे हैं। इन दिनों राजकीय अस्पतालों की ओपीडी में सर्वाधिक मौसमी बीमारियों के पीड़ित आ रहे हैं। लेकिन यहां दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है। अस्पतालों में कई प्रमुख दवाइयां उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मरीज बाहर से दवा क्रय करने या प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने के लिए मजबूर हैं। केंद्र और प्रदेश सरकार राजकीय अस्पतालों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए पानी की तरह धन खर्च कर रही है। बावजूद इसके अस्पतालों में मरीजों को प्रमुख दवाइयां नहीं मिल रही है। जिला अस्पताल में पैरासिटामाल, लिवोसेट्रीजीन, मेट्रोनिडाजोल, एलबेंडाजोल, लिवोफ्लाक्सासीन, ओफ्लाक्सासीन, कोट्राइमेक्साजॉल, इरीथ्रोमाइसीन, एजीथ्रोमाइसीन, सीप्रोफ्लाक्सासीन प्लस टिनीडाजोल, नार्फ्लाक्स, डाइक्लोफेनक प्लस टिजानीडिन, निमोसनाइड, एस्प्रीन, डाइसाइक्लोमीन प्लस पैरासीटामाल, एलूप्यूरीनाल बी काम्लेक्स, रेनीटिडिन, एंटासीड समेत 48 दवाओं की सूची लिखी है। लेकिन अधिकांश रोगियों को दर्द, बुखा की दवा थमाया जाता है। यही हाल सीएचसी और पीएचसी का है। अधिकांश डॉक्टर अपने सेटिंग वाले दुकानों का ही दवा लिखते है। अस्पतालों में दवा न मिलने के कारण रोगी विवश होकर बाहर से दवा क्रय कर रहे हैं। इस संबंध में जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. पीबी गौतम ने कहा कि अस्पतालों में सभी रोगों की दवाएं है और मरीजों को दी भी जाती है। अगर किसी मरीज को दवा न मिलती हो तो उन्हें अवगत कराए। उधर सीएमओ डॉ. एसपी सिंह का भी दावा है कि सभी सीएचसी, पीएचसी पर पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं।