रेउसा (सीतापुर)। बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी से नदियां फिर उफनाने लगी हैं। जिले के गांजरी इलाके से होकर बहने वाली सरयू व शारदा नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। सोमवार को घाघरा व शारदा के जलस्तर में करीब एक फीट की वृद्धि देखी गई। सोमवार को तीनों बैराजों से दो लाख 64 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी जिले में पहुंचने पर नदियों में उफान आ सकता है। ऐसे में बाढ़ की आशंका को देखते हुए तटवर्ती गांवों के बाशिंदे सहमे हुए हैं।
हर साल बाढ़ की विभीषिका से जिले की तीन तहसीलों बिसवां, लहरपुर और महमूदाबाद के इलाके प्रभावित होते हैं। ब्लॉक रेउसा का इलाका ज्यादा प्रभावित होता है। इस साल अभी तक नदियों में उफान के बाद जलस्तर फिर घट रहा है। लिहाजा, बाढ़ इस बार ज्यादा तबाही नहीं मचा सकी है। एक-दो दिन राहत मिलने की उम्मीद जगते ही नदियों का जलस्तर फिर बढ़ने लगता है और संभावित बाढ़ की आशंका के चलते तटवर्ती क्षेत्र के बाशिंदों की नींद उड़ जाती है।
पिछले एक सप्ताह से नदियों के जलस्तर में उतार चढ़ाव ग्रामीणों की परेशानी का सबब बना हुआ है। रविवार को जलस्तर में मामूली इजाफे के बाद से धीमी गति के साथ पानी लगातार बढ़ रहा है। सोमवार को घाघरा बैराज से 91 हजार 966 क्यूसेक, बनवसा बैराज से एक लाख 13 हजार 77 क्यूसेक व शारदा बैराज से 41 हजार 859 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जल्द ही यह पानी जिले तक पहुंचेगा।
इस बीच बैराजों से और पानी छोड़ दिया गया तो नदियों में उफान आना तय है। नदियां उफनाई तो सबसे पहले तटीय क्षेत्र के गांव प्रभावित होंगे। इस आशंका से पासिनपुरवा, परमेश्वरपुरवा, दुर्गापुरवा, दर्जिनरेती आदि गांवों के लोग भयभीत हैं। ग्रामीणों की मानें तो जलस्तर इसी गति से बढ़ता रहा तो बहुत जल्द बाढ़ आ सकती है।
बैराजों से पानी छोड़े जाने के चलते शारदा व सरयू नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी देखी जा रही है। मामूली इजाफा कोई खास असर नहीं डाल पाएगा। नदियां अपनी हद में बह रही हैं। बाढ़ जैसे कोई हालात नहीं हैं। नजर रखी जा रही है।
- अभिचल प्रताप सिंह, तहसीलदार, बिसवां