तंबौर(सीतापुर)। अघोषित बिजली कटौती से नाराज ग्रामीणों ने बीती रात तंबौर उपकेंद्र पर घंटों जमकर हंगामा काटा। वे उग्र हो गए और उपकेंद्र पर मौजूद कर्मचारियों को पीट दिया, कार्यालय में रखे अभिलेख फाड़ दिए व कंप्यूटर तोड़ दिया। कर्मचारियों ने खेतों में भागकर किसी तरह अपनी जान बचाई।
इसके बाद कर्मचारियों ने गुस्से में आकर करीब 150 गांवों की तत्काल आपूर्ति ठप कर दी। कार्रवाई की मांग को लेकर सोमवार सुबह उपकेंद्र पर ही वे धरने पर बैठ गए। अधिशाषी अभियंता व सीओ के आश्वासन पर व मुकदमा दर्ज कराने पर कर्मचारियों का गुस्सा शांत हुआ और धरना खत्म किया। इस दौरान करीब 20 घंटे आपूर्ति बंद रही। एक लाख आबादी को नुकसान उठाना पड़ा।
विद्युत उपकेंद्र तंबौर से खंभरिया, बेहटा, काशीपुर, तंबौर टाउन व तंबौर देहात फीडर संचालित हो रहे हैं। इनके जरिए करीब 150 गांवों को आपूर्ति दी जाती है। बीती रात अघोषित कटौती से नाराज होकर करीब 15 उपद्रवी रात 10 बजे उपकेंद्र पहुंच गए। इन लोगों ने कर्मचारी अमर सिंह, हरीश व संजय कुमार के साथ मारपीट शुरू कर दी। उपकेंद्र पर रखे सरकारी अभिलेख फाड़ दिए। कंप्यूटर सेट तोड़ दिया। आरोप यह भी है कि उपद्रवी बिलिंग के रखे 75 हजार रुपये भी उठा ले गए।
अवर अभियंता अमरीश कुमार ने मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल की। उसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। ग्रामीणाें के उपद्रव से नाराज कर्मचारियों ने सभी फीडरों की आपूर्ति रात में ही बंद कर दी। सुबह वे उपकेंद्र पर धरने पर बैठ गए। पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। अधिशाषी अभियंता धीरज व सीओ बिसवां अभिषेक प्रताप मौके पर पहुंचे। उन्होंने मुकदमा दर्ज कराने का आश्वासन देकर मामला शांत कराया। लेकिन शाम छह बजे तक आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी।
तीन से चार घंटे ही मिल रही बिजली
उपभोक्ताओं का कहना है कि उपकेंद्र से जुड़े चार फीडरों के लोग 15 दिनों से परेशान हैं। 24 घंटे में महज तीन से चार घंटे ही बिजली मिल रही है। कस्बे में रोस्टिंग के बाद बिजली आने पर बार-बार ट्रिपिंग होती है। आरोप है कि कस्बे में रोजाना चेकिंग के नाम पर कर्मचारी वसूली करते हैं। लापरवाही तो इस कदर है कि दो दिन पहले एक लाइनमैन पोल पर बिजली ठीक कर रहा था। इसी दौरान करंट लगने से वह झुलस गया और पोल से गिर कर गंभीर रूप से चोटिल हो गया। अब वह लखनऊ में जिंदगी व मौत के बीच जूझ रहा है।
25 प्लाईवुड फैक्ट्रियां बंद रही, लाखों का नुकसान
तंबौर कस्बे में 25 प्लाईवुड फैक्ट्रियां चल रही हैं। 20 घंटे बिजली गुल होने से इनका कारोबार ठप हो गया। कई जगहों पर जनरेटर चले, लेकिन डीजल से लागत अधिक आने के कारण सिर्फ जरूरी काम निपटाए गए। फैक्ट्री मालिकों ने कहा कि इससे लाखों का नुकसान उठाना पड़ा है।