लहरपुर (सीतापुर)। ग्राम आंबा में बहन के घर आया शातिर अपराधी संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगने से घायल हो गया। परिजन उसे लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, जहां से उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
सकरन थाना क्षेत्र के जालिमपुर गांव निवासी दुशासन शातिर अपराधी है। जिले के अलग-अलग थानों में उसके खिलाफ 10 आपराधिक मामले दर्ज हैं। सभी मामले गंभीर धाराओं के हैं। दुशासन की पत्नी दुर्गा देवी ने शनिवार को लहरपुर कोतवाली पहुंचकर पुलिस को दी तहरीर में कहा कि वह पति के साथ 26 मई को उसकी बहन के गांव आंबा गई थी।
जालिमपुर निवासी हरेश और मायाराम निवासी जालिमपुर मरोड़ थाना तंबौर दुशासन को बुलाकर साथ ले गए थे। आरोप है कि उसे साथ ले जाकर मायाराम और हरेश ने ही दुशासन को गोली मार दी। एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराया गया, लेकिन राहत न मिलने पर सीएचसी लहरपुर लाया गया और यहां से जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
दुशासन गोली लगने से घायल हुआ है। मायाराम और हरेश पर गोली मारने का आरोप है। बहुत उम्मीद है कि किसी घटना में माल के बंटवारे को लेकर विवाद के कारण गोली मारी गई है। रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। विवेचना की जा रही है।
आलोकमणि त्रिपाठी, कोतवाल
क्या हुआ है और क्या बता रहे हो...
दुशासन को संदिग्ध हालात में गोली लगने के पीछे की कहानी कुछ और ही है। दरअसल, सारा खेल भदफर पुलिस चौकी के पुलिस कर्मियों ने किया है। चौकी प्रभारी और यहां तैनात सिपाहियों को बचाने के लिए नई कहानी गढ़ी गई और इसी आधार पर मामला भी दर्ज करा दिया गया। न सिर्फ पुलिस से जुड़े विश्वस्त सूत्र बल्कि आंबा गांव के लोग भी हकीकत बता देते हैं। दुशासन अपने साथियों के साथ लूट की वारदात को अंजाम देने के लिए एक गांव गया था। यहां फायरिंग के दौरान दुशासन को गोली लग गई। साथी उसे अपने साथ उठा ले गए। लखीमपुर के एक प्राइवेट अस्पताल में दुशासन के कई परिचित काम करते हैं। इसी अस्पताल में उसे भर्ती कराया गया। हालत में सुधार न होने पर एक अच्छे अस्पताल ले जाया गया। यहां सीटी स्कैन के दौरान उसके शरीर में कारतूस के छर्रे फंसे मिले। अस्पताल ने मामला गंभीर बताते हुए पुलिस के जरिए इलाज के लिए आने की नसीहत दी। इसके बाद दुशासन के परिजन लहरपुर कोतवाली पहुंचे और शनिवार को पूरी घटना बताई। दरअसल, हकीकत यह है कि घटना की जानकारी भदफर चौकी पर तैनात सभी पुलिस कर्मियों को थी, लेकिन किसी ने भी इसकी जानकारी न तो कोतवाल को दी, न सीओ को और न ही अन्य अफसरों को।