सीतापुर। कोरोनाकाल के बाद बच्चों का टीकाकरण अभियान पटरी पर नहीं लौट पाया। कभी बंदी तो कभी टीका न होने की वजह से बच्चे इससे वंचित हो रहे है। जिले के करीब दो लाख बच्चे दो माह से पीसीवी अर्थात न्यूमोकॉकल कॉन्जुगगेट वैक्सीन का इंतजार कर रहेे हैं। जिले में इस टीके की एक भी डोज नहीं है। इससे बच्चों में निमोनिया का खतरा बना हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग की तरफ से इस समय नियमित टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान 13 फरवरी से शुरू हुआ था जो 27 फरवरी तक चलेगा। स्वास्थ्य टीमें घर-घर जाकर बच्चों का टीकाकरण कर रही हैं लेकिन इस टीकाकरण अभियान में पीसीवी का टीका नहीं है। यह टीका बच्चों को निमोनिया से बचाने के लिए लगाया जाता है।
लेकिन इस समय यह टीका नहीं है। टीमें गांव जाती है लेकिन टीका न होने की वजह से लगा नही पातीं। इससे करीब दो लाख बच्चों को टीका नहीं लग पा रहा है।
बाजार में है करीब पांच हजार का टीका
सरकारी स्तर पर इस टीके की सप्लाई नहीं है। इसकी वजह से बच्चों को यह टीका नहीं लग पा रहा है। अगर प्राइवेट में यह टीका लगवाने का प्रयास किया जाए तो यह बाजार में करीब पांच हजार रुपये मूल्य चुकाना पड़ेगा। इतना महंगा टीका लोगों को लगवाना बहुत मुश्किल है।
ऐसे फैलता है निमोनिया
डॉ. उदय प्रताप ने बताया निमोनिया छींकने या खांसने से फैलने वाला संक्रामक रोग है। इसलिए शिशुओं की विशेष देखभाल आवश्यक है। निमोनिया से ग्रसित होने का खतरा पांच साल से कम उम्र के बच्चों को सबसे ज्यादा है। यह रोग बैक्टीरिया, वायरस या फंगस से फेफड़ोंं में संक्रमण से होता है।
एक या दोनों फेफड़ों के वायु के थैलों में द्रव या मवाद भरकर उसमें सूजन पैदा हो जाती है जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है। बच्चों को सर्दी में निमोनिया होने का खतरा ज्यादा बढ़ता है, जो जानलेवा भी हो सकता है।
इस अंतराल पर लगता है टीका
पीसीवी या न्यूमोकॉकल कॉन्जुगगेट वैक्सीन के टीके शिशु को दो माह, चार माह, छह, 12 माह और 15 माह के अंतराल पर लगाने होते हैं। यह टीका ना सिर्फ निमोनिया बल्कि सेप्टिसीमिया, मैनिंजाइटिस या दिमागी बुखार आदि से भी शिशुओं को बचाता है।
नहीं आ रही है सप्लाई
सरकारी स्तर पर दो माह से इस टीके की सप्लाई नहीं आ रही है। इसके अलावा अन्य सभी टीके मौजूद हैं जो बच्चों को लगाए जा रहे हैं।
डॉ. उदय प्रताप, प्रभारी सीएमओ