सीतापुर/खैराबाद। अगर आप सीतापुर डिपो की रोडवेज बस में सफर करने जा रहे हैं तो पहले बस की फिटनेस के बारे में पता कर लीजिए। सवाल सिर्फ सफर का नहीं आपकी सुरक्षा का है। ऐसा इसलिए जरूरी है क्योंकि महकमे के जिम्मेदार आपकी सुरक्षा को लेकर संजीदा नहीं हैं। किसी बस का स्टीयरिंग हार्ड है, किसी के ब्रेक में खराबी है तो किसी बस के पहिए में पूरे नट बोल्ट नहीं लगे हैं।
खतरनाक तकनीकी खामियां होने के बाद भी बसें सवारियां लेकर फर्राटा भर रही हैं। इतना ही नहीं डिपो के बेड़े की कई बसों ने निर्धारित मानक 12 लाख किमी. का सफर पूरा कर लिया है फिर भी उन्हें सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है। ऐसी बसों में मुसाफिरों के साथ चालक-परिचालकों की जान का भी जोखिम बना रहता है। सीतापुर डिपो से 168 बसें संचालित की जा रही हैं। इनमें 101 बसें निगम की जबकि 67 बसें अनुबंधित हैं।
अनुबंधित बसों में खराबी आने पर मरम्मत की जिम्मेदारी मालिक की होती है। निगम की बसों की देखरेख व मरम्मत विभाग को करना होता है। शासन का सख्त आदेश है कि तकनीकी खराबी होने पर बसों को वर्कशॉप भेजा जाए। बसों की मरम्मत के बाद ही उन्हें सड़क पर उतारा जाए। इसके बाद भी सीतापुर डिपो से बेधड़क अनफिट बसें संचालित की जा रही हैं। अमर उजाला की पड़ताल में ऐसे कई मामले सामने आए हैं।
नाम न छापने की शर्त पर कई चालकों ने बताया कि अधिकांश बसों में स्टीयरिंग हार्ड है। बस चलाने में दिक्कत होती है। वर्कशॉप में शिकायत दर्ज कराने के बाद भी ध्यान नहीं दिया जाता है। कुछ बसें पंप में खराबी से अत्यधिक धुआं उगलती हैं, इससे प्रदूषण फैलता है। तमाम बसों के ब्रेक कमजोर हैं। नट बोल्ट कम होना, सीट फटी, खिड़की के शीशे टूटे या जाम होना, गियर बाक्स में आवाज, लाइट कमजोर होने सरीखी समस्याएं भी बसों में बनी रहती हैं।
पहिए में नट बोल्ट कम, बस भेज दी हरिद्वार
सीतापुर डिपो की बस संख्या यूपी 30 एटी 1690 मरम्मत के लिए वर्कशॉप में खड़ी थी। गत 10 दिसंबर को उसे वर्कशॉप से फिट बताकर निकाल दिया गया। जबकि बस में एक तरफ के पिछले पहिए में चार नट बोल्ट कम लगे थे। बस स्टॉप से उसे हरिद्वार रवाना कर दिया गया। नट बोल्ट कम होने से बाकी नट बोल्ट पर दबाव अधिक पड़ने व एक्सेल निकलने का खतरा था।
स्टीयरिंग में खराबी, रवाना कर दी बस
सीतापुर डिपो की बस संख्या यूपी 15 एटी 1268 की स्टीयरिंग में खराबी थी। चालक ने चार दिसबंर को वर्कशॉप में शिकायत दर्ज कराई। मरम्मत नहीं होने पर उसी दशा में छह दिसबंर को बस शाहजहांपुर व बरेली के लिए रवाना कर दी गई। बरेली में दिक्कत बढ़ने से बस चलाना संभव नहीं हुआ तो चालक उसे वर्कशॉप लेकर पहुंचा। मरम्मत के बाद वापस आकर आठ दिसंबर को बस डिफेक्टिव में दर्ज कराते हुए यहां के वर्कशॉप में खड़ी कर दी।
12 लाख किमी. की दूरी तय कर चुकी हैं 20 बसें
सीतापुर डिपो के बेड़े में शामिल 101 बसों में से लगभग 20 बसें 12 लाख किमी. का सफर पूरा कर चुकी हैं। रोडवेज की बसें 12 साल या 11 लाख किमी. चलने के बाद रिजेक्ट करने का प्रावधान है। लेकिन निर्धारित दूरी का सफर पूरा करने के बाद भी 20 बसें दौड़ाई जा रही हैं। वर्कशॉप के जूनियर फोरमैन आरएल श्रीवास्तव बताते हैं कि इस समय 18 बसें डिफेक्टेड आई हैं, जिनकी मरम्मत हो रही है। बसों को दुरुस्त करके ही वर्कशॉप से बाहर जाने दिया जाता है। समयावधि पूरी करने वाली बसों को मुख्यालय के निर्देश पर सरेंडर कर दिया जाता है।
गंतव्य से आने के बाद प्रत्येक बस की फिटनेस जांची जाती है। जो कमियां मिलती हैं, उन्हें दुरुस्त कराया जाता है। फिट बसों को चालक की सहमति के बाद ही वर्कशॉप से निकाला जाता है। निर्धारित किमी. चलने वाली बसों की नीलामी मुख्यालय स्तर से की जाती है।
- राकेश कुमार, एआरएम सीतापुर डिपो