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Sitapur News: मौनी अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने किया स्नान-दान

Sat, 10 Feb 2024 01:50 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
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नैमिषारण्य/सीतापुर। मौनी अमावस्या पर संतों की नगरी में आस्था का सैलाब उमड़ा। ठंड पर श्रद्धा भारी पड़ी। आदि गंगा गोमती व पवित्र तीर्थ में लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद दान एवं तर्पण किया। शुक्रवार की ब्रह्मबेला से शुरू हुआ स्नान, दान व पूजन का क्रम दिनभर चलता रहा। जयकारों से तीर्थ गुंजायमान हो गया। लोगों ने स्नान के बाद तिल व खिचड़ी का दान किया।
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माघ मास की अमावस्या पर्व पर स्नान और दान करने का अलग ही महत्व है। इसे मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस पुनीत अवसर पर पुण्य लाभ लेने के लिए देशभर से श्रद्धालुओं का नैमिष पहुंचने का क्रम बृहस्पतिवार देर शाम से शुरू हो गया। मध्यरात्रि के बाद से ही चक्रतीर्थ व गोमती में स्नान एवं आचमन, सिलसिला प्रारंभ हो गया। पुरोहितों को अन्न एवं दक्षिणा भेंटकर श्रद्धालुओं ने पुण्य लाभ अर्जित किया। भोर में ठंड के चलते स्नानार्थियों की संख्या में थोड़ी कमी दिखी, लेकिन सूर्य के उदय होते भक्तों की संख्या बढ़ती गई।
गोमती के राजघाट व चक्रतीर्थ में स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने मां ललिता देवी मंदिर में प्रसाद एवं चूनर चढ़ाकर माथा टेका। पवित्र पंच प्रयाग तीर्थ में मार्जन किया। इसके उपरांत प्रमुख दर्शनीय स्थलों कालीपीठ, हनुमान गढ़ी, सूत गद्दी, व्यासगद्दी, देवपुरी मंदिर, बालाजी मंदिर, देवदेवेश्वर आदि में दर्शन-पूजन कर मनौतियां मांगी। प्रसिद्ध मंदिरों में पूरे दिन पूजा, पाठ व अनुष्ठानों का दौर चलता रहा। तीर्थ स्थल पर यजमानों ने पितृदोष निवारण के लिए अपने पुरोहितों से पिंडदान और तर्पण भी कराया और सुख शांति की कामना की।
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पवित्र सरोवर में स्नान से सभी रोगों से मिलती मुक्ति
लहरपुर/सीतापुर। प्रसिद्ध सूर्य कुंड मंदिर के तीर्थ में मौनी अमावस्या पर्व पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने स्नान, दान व पूजन किया। मौन व्रत रखकर पवित्र सरोवर में स्नान कर श्रद्धालुओं ने भगवान शंकर की विशेष पूजा अर्चना की। सूर्य भगवान को अर्ध्य दिया। मान्यता है, कि इस पवित्र सरोवर में स्नान करने से मनुष्य सभी रोगों से मुक्त हो जाता है। मौनी अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने जगह-जगह हवन पूजन किया और सुख समृद्धि के लिए भगवान शंकर का रुद्राभिषेक कर कथा सुनी। पुरोहितों व जरूरतमंदों को दान किया। भंडारों में भारी संख्या श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान एक मेले का भी आयोजन किया गया।
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