महोली (सीतापुर)। क्षेत्र के श्यामजीरा गांव में ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने गन्ने के एक खेत में बाघ के छिपे होने की पुष्टि की है। प्रभागीय वन निदेशक ने निजी स्तर पर ड्रोन कैमरे की व्यवस्था कर खेत की वीडियोग्राफी कराई तो इसमें भी बाघ नजर आ गया।
अब वन विभाग ने यहां पिंजरा लगाकर बाघ को पकड़ने की कवायद शुरू कर दी है। हालांकि विभाग यह प्रयास भी कर रहा है कि बाघ खुद ही निकलकर वापस जंगल की ओर चला जाए।
शनिवार सुबह लगभग दस बजे श्यामजीरा गांव निवासी रमेश कुमार खेत में मजदूरों के साथ गन्ने की कटाई कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने जंगली जानवर को खेत से छलांग लगाकर भागते देखा। जंगली जानवर 200 मीटर दूर एक दूसरे गन्ने के खेत में जा छिपा।
शोर मचाने पर ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और पुलिस व वन विभाग को सूचना दी। मौके पर महोली के रेंजर केएन भार्गव, उपप्रभागीय वन निदेशक रविंद्र गुप्ता भी पहुंच गए। आसपास के खाली पड़े खेतों में पगमार्क दिखे। इसके बाद कांबिंग शुरू की गई।
इसी दौरान प्रभागीय वन निदेशक बृजमोहन शुक्ला भी पहुंचे। उन्होंने ड्रोन कैमरे से आसपास के खेत की वीडियोग्राफी कराई। ड्रोन कैमरे में बाघ नजर आ गया। प्रभागीय निदेशक वन ने बताया कि उच्चाधिकारियों को जानकारी दे दी गई है। लखनऊ व लखीमपुर के संबंधित अधिकारियों को भी अलर्ट किया गया है। बताया कि बहुत उम्मीद है कि बहराइच या लखीमपुर के रास्ते बाघ जिले में आ गया होगा।
.... कठिना नदी के किनारे सीतापुर आ गया बाघ
विभागीय सूत्र बताते हैं कि कठिना नदी के किनारे लखीमपुर से यह बाघ जिले में आ गया। आम तौर पर बाघ बहुत शांत होता है और जब तक उसे खुद पर खतरा नजर नहीं आता, तब तक वह हमला नहीं करता है। यही वजह है कि विभाग प्रयास कर रहा है कि बाघ जिस रास्ते आया है, उसी रास्ते से वापस भी चला जाए।
कैमरे से रखी जा रही निगरानी
बाघ की चहल-पहल पर निगाह रखने के लिए कैमरा लगाया गया है। इससे पता चलता रहेगा कि बाघ किस दिशा की ओर जा रहा है। अभी तक महोली और आसपास के इलाकों में बाघ के किसी पर भी हमला करने की जानकारी नहीं आई है।
बृजमोहन शुक्ला, प्रभागीय निदेशक, वन