सीतापुर। मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन के खिलाफ मंगलवार को भी निजी ट्रांसपोर्ट चालक हड़ताल पर रहे। वहीं, परिवहन निगम के बस चालकों ने भी चक्का जाम कर प्रस्तावित कानून को वापस लेने की मांग की। मंगलवार सुबह एआरएम ने कुछ चालकों को समझाकर बसों को रवाना करने का प्रयास किया। हालांकि चालकों ने इन बसों को रुकवा दिया और बसें नहीं संचालित होने दीं। जिन चालकों ने प्रदर्शन कर रहे कर्मियों की बात नहीं मानीं, उनसे जोर जबरदस्ती कर बसें खड़ी करवाई गईं। इस दौरान परिवहन निगम को करीब 22 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। बसों में सफर करने वाले यात्री परेशान होकर भटकते नजर आए।
मंगलवार को दूसरे दिन भी हड़ताल का असर देखने को मिला। सुबह कुछ बसों का संचालन तो किया गया लेकिन विभाग उसमें सफल नहीं हो सका।
बस अड्डे पर सन्नाटा पसरा रहा। हड़ताल की जानकारी होने के बाद यात्री बस अड्डे तक पहुंच ही नहीं सके। उधर, परिवहन विभाग के अफसरों ने छह बसों को रवाना कर दिया। जिसमें तीन बसें लखनऊ, एक बहराइच, एक शाहजहांपुर और एक हरदोई रूट पर भेजी गई। जिसमें सिर्फ शाहजहांपुर और हरदोई की बस ही गंतव्य तक पहुंच सकी। बहराइच जाने वाली बस को बिसवां में ही रोक लिया गया। जिसकी जानकारी एआरएम को हुई तो उन्होंने एसडीएम को मामले की जानकारी दी। इधर लखनऊ भेजी गई तीनों बसें लखनऊ में ही रोक दी गईं। बसों से यात्रियों को उतार दिया गया। वहीं चालकाें को चेतावनी देकर छोड़ा गया। जिले में परिवहन निगम की 101 और 64 अनुबंधित बसें हैं। जिन पर कुल 235 चालक और 300 परिचालक हैं। देर शाम तक एआरएम बसों का संचालन कराने के प्रयास में रहे। लेकिन बसें नहीं चल सकीं। एआरएम राकेश कुमार ने बताया कि लगातार डीएम, एसपी से संवाद कर चालकों को समझाने का काम किया जा रहा है। दूसरे दिन भी राजस्व को करीब 22 लाख का ही नुकसान होगा।
डीजल पेट्रोल भरवाने की मची होड़, कई जगह डीजल खत्म
ट्रक व बस चालकों की हड़ताल का असर डीजल-पेट्रोल की आपूर्ति पर पड़ा है। कई पंपों पर डीजल पेट्रोल खत्म हो गया। वहीं एक साथ तीन सौ रुपये का पेट्रोल व 50 लीटर से अधिक डीजल नहीं दिया गया। इससे दिनभर पंपों पर ग्राहक व संचालकों के बीच नोकझोंक होती रही। लोग पेट्रोल व डीजल भरवाने के लिए एक पंप से दूसरे पंप की ओर आते जाते रहे। हड़ताल के दूसरे दिन मालवाहक वाहनों के पहिए थम गए। इससे गैर जनपदों से आने वाला डीजल पेट्रोल पंपों पर नहीं पहुंच सका। पहले से स्टॉक माल का वितरण किया गया। ऑर्डर के बाद दोपहर तक लोग वाहनों का इंतजार करते रहे। वहीं डिमांड बढ़ती चली गई। जब माल नहीं आया तो इसका संकट खड़ा होने लगा। इससे ग्राहकों की डिमांड में कटौती करनी शुरू कर दी गई।
प्रकाश पेट्रोल पंप पर रिजर्व रखा गया डीजल
शहर के प्रकाश पेट्रोल पंप पर दोपहर बाद डीजल की बिक्री बंद कर दी गई। यहां सरकारी वाहनों व एंबुलेंस के लिए चार हजार लीटर डीजल को रिजर्व कर दिया गया। वहीं, सीतापुर से अटरिया के बीच पड़ने वाले तीन पेट्रोल पंप पर डीजल खत्म हो गया। इसी तरह मिश्रिख, महमूदाबाद व सीतापुर व महोली के बीच पड़ने वाले पेट्रोल पंपों पर असर दिखाई दिया। लालबाग चौराहे पर पेट्रोल डलवाने गए मोहित ने बताया कि 300 रुपये का पेट्रोल लेना था। लेकिन पंप संचालक ने केवल सौ रुपये का पेट्रोल दिया। उसके बाद दूसरे पंप पर गए तो वहां पर भी महज सौ रुपये का ही पेट्रोल मिला। इसी तरह कांशीराम कॉलोनी के निकट एक पंप पर उपेंद्र कृषि कार्य के लिए 200 लीटर डीजल लेना चाहते थे तो पंप संचालक ने केवल 50 लीटर ही डीजल दिया। इसी तरह तमाम लोगों को जरूरत के मुताबिक डीजल पेट्रोल नहीं मिला। इससे हर तरफ इसको खरीदने की होड़ मची रही। यह हालात शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में दिखाई दिए।
जिले में हैं 204 पेट्रोल पंप
जिला पूर्ति अधिकारी अखिलेश श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में 204 पेट्रोल पंप हैं। जिसमें शहरी क्षेत्र में 8 व शहर से सटे हाईवे पर दो पेट्रोल पंप हैं। शेष पेट्रोल पंप ग्रामीण इलाकों व कस्बों में हैं। इसके जरिए 50 लाख आबादी की जरूरतें पूरी की जाती हैं। सीतापुर डीलर पेट्रोलियम एसोसिएशन के अध्यक्ष सनी बेग ने बताया कि औसतन एक पेट्रोल पंप पर रोजाना तीन हजार लीटर डीजल/पेट्रोल बिकता है। रोजाना जिले में 6.12 लाख लीटर पेट्रोल व डीजल की आवाजाही रहती है। मंगलवार को बाहर से पेट्रोल डीजल नहीं आया। इसकी वजह से लोगों को डिमांड के मुताबिक नहीं दिया गया।
स्टॉक के अनुसार हो रहा है वितरण
अगर हड़ताल एक दो दिन और बढ़ गई तो हालात बिगड़ जाएंगे। पंपों पर स्टॉक के अनुसार ग्राहकों को डीजल-पेट्रोल दिया जा रहा है।
सनी बेग, अध्यक्ष, सीतापुर डीलर पेट्रोलियम एसोसिएशन