गोंदलामऊ (सीतापुर।)। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पात्रों के चयन में जमकर खेल किया गया। जिस अपात्र को चाहा पात्र कर दिया और पात्र को अपात्र कर दिया। नतीजा यह कि पक्के मकान वाले आवासीय योजना से लाभान्वित हो गए और जरूरतमंद वंचित रह गए। पक्के मकान होने के बाद भी अपात्रों को आवास योजना का लाभ दे दिया है।
केस-1
गोंदलामऊ विकास खंड की ग्राम पंचायत केसुआमऊ में पंकज कुमार को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत लाभ दिया गया है। पंकज और उसका भाई सुशील पिता बालकराम के साथ ही रहते हैं। गांव में बड़े क्षेत्रफल में पक्का मकान बना है, लेकिन सत्यापन के दौरान अफसरोंं को बरगला दिया गया।
केस-2
गोंदलामऊ विकास खंड की ही ग्राम पंचायत केसुआमऊ के मजरा मजलिसपुर में गंगादेवी को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत लाभ दिया गया है। गंगादेवी के पति महेश का गांव में ही बड़ा पक्का मकान है। जांच के दौरान ग्रामीणों ने सत्यापन करने वाले अफसरों को जानकारी दी थी, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
केस-3
मजलिसपुर में ही रहने वाली नीलम को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया गया है। नीलम के पति सुनील कुमार का भी मकान पूरा पक्का बना हुआ है। इसकी जानकारी भी सत्यापन करने आए अधिकारियों को दी गई थी, लेकिन फिर भी उसे आवास आवंटित कर दिया गया।
और यह पात्र भटक रहे
गोंदलामऊ विकास खंड के बरताल मेें मनोज परिवार के साथ रहता है। कच्ची दीवारों पर टूटी टीन पड़ी है। दरवाजे नहीं हैं, लेकिन उसकी यह परेशानी अफसरों को नहीं दिखी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उसे लाभ नहीं दिया गया। बरताल में ही दिलकेश अपनी पत्नी ऊषा के साथ रहते हैं। दिलकेश मजदूरी करता है। कच्चा मकान है, लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ उसे नहीं मिला। बरताल में ही संतराम अपनी पत्नी नीलम देवी के साथ रहता है। पति पत्नी दोनों मजदूरी करते हैं। मकान के नाम पर छप्पर है। एक भी कोठरी नहीं है, लेकिन विभागीय अधिकारियों को यह नजर नहीं आता।
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में कुछ जगहों से अपात्रों को आवास आवंटित किए जाने की शिकायतें मिली हैं। कमेटी बनाकर इन शिकायतों का निस्तारण स्थलीय सत्यापन के साथ कराया जाएगा।
अनुज सिंह, डीएम