गोंदलामऊ/सीतापुर। रामगढ़ चीनी मिल में जिम्मेदारों की लापरवाही का आलम यह है कि मृतक के नाम सट्टा आवंटन कर दिया। इतना ही नहीं पर्ची भी जारी कर दी गई। अब उस पर्ची पर मिल को गन्ने की आपूर्ति भी शुरू हो गई। कई किसानों के सट्टा में रकबा वास्तविक जमीन से कई गुना ज्यादा दर्ज है।
रामगढ़ समिति क्षेत्र के लेखनापुर गांव में रहने वाले उस्मान पुत्र वसीर का काफी समय पहले पहले निधन हो चुका है। इसके बाद उस्मान के नाम दर्ज जमीन की वरासत पत्नी खातून व बेटों सोफिन, तौफीक और साहिल के नाम हो गई। गन्ना रकबा सर्वे हुआ तो दस्तावेजों में मृतक उस्मान की पत्नी और बेटों के नाम अलग-अलग दर्ज सट्टा आवंटित कर दिया गया। लेकिन मृतक उस्मान का सट्टा रद्द नहीं किया गया। यहां गन्ना माफिया ने जिम्मेदारों से सांठगांठ कर मृतक उस्मान के नाम पुन: सट्टा आवंटित करा लिया गया। पेराई सत्र शुरू होने के बाद इस सट्टे पर पर्ची जारी कर दी गई। उस्मान के सट्टे की पर्ची पर एक ट्रॉली लगभग (60 क्विंटल) गन्ने की आपूर्ति रामगढ़ मिल को कर दी गई।
हैरत की बात यह है, कि सर्वे में पूरी टीम गांव पहुंचकर मौके पर रकबा देखने और संबंधित किसान के बारे में जानकारी हासिल करने के बाद ही रिपोर्ट लगाती है। किसान से शपथ पत्र भी लिया जाता है। इसके बाद सट्टा आवंटन होता है, यह सारी प्रक्रिया ऑनलाइन है। इसके बाद भी मृतक के नाम सट्टा आंवटन पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल है।
सट्टे पर वास्तविक रकबा से अधिक जमीन दर्ज
जैनापुर के रहने वाले राजकुमार यादव के पास 10 बीघा गन्ना रकबा है। सर्वे में गड़बड़ी के चलते राजकुमार के सट्टा में 21 बीघा गन्ना रकबा दर्शा रहा है। इसी तरह बसंतपुर निवासी बिनेश के पास एक बीघा जमीन है। सर्वे के बाद आंवटित सट्टा में 12 बीघा गन्ना रकबा दर्ज है।
जांच कर होगी कार्रवाई
मृतक का सट्टा आवंटन बड़ी चूक है। मामले की तत्काल जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी पाया जाएगा उसके विरुद्ध उचित कार्रवाई होगी। अन्य सट्टा में जो भी खामियां होंगी उन्हें दूर कराया जाएगा।
-सच्चिदानंद सिंह, ज्येष्ठ गन्ना निरीक्षक, रामगढ़ समिति