संवाद न्यूज एजेंसीसीतापुर। शासन के आदेश है कि विलुप्त हो रही नदियों को पुनर्जीवित किया जाए। इसके लिए मनरेगा से जरूरी कार्य जैसे तालाब निर्माण, बंधा, ड्रेन आदि कार्य कराए जाएं। इस संबंध में बीते साल सरायन नदी के लिए कार्य योजना बनाई गई थी। आठ ब्लॉकों की 79 ग्राम पंचायतों में कार्य कराए जाने हैं। बावजूद इसके यह योजना फाइलों में कैद है। जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
सरायन नदी जिले के आठ ब्लॉक क्षेत्र की 79 ग्राम पंचायतों से गुजरी है। 166 किमी. लंबाई में बह रही नदी के पुनरुद्धार के लिए मनरेगा के तहत कार्य योजना बनाई गई थी। इसके तहत तालाबों और नालों का जीर्णोद्धार, पौधरोपण, बंधा निर्माण, व्यक्तिगत मेड़बंदी आदि कार्य कराए जाने हैं। यह कार्य अधूरे हैं। 104 तालाबों के सापेक्ष 43 का ही जीर्णोद्धार हो सका। 183 नालों का जीर्णोद्धार कराया जाना था। जबकि 35 में प्रगति हो सकी है। इसी तरह पौधरोपण सहित अन्य कार्य भी पूर्ण नहीं हुए हैं। 84 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। बीते साल जुलाई माह के बाद इन कार्यों की समीक्षा भी नहीं हो सकी है। इससे नदी के पुनरुद्धार की योजना अधर में हैं।
इन ब्लॉकों में कराए जाने है कार्य
नदी को सदानीरा करने के लिए जल श्रोतों के कैचमेंट क्षेत्र मे कार्य कराना जाना है। इसी के तहत विकास खंड हरगांव, खैराबाद, सिधौली, एलिया, मछरेहटा, गोदलामऊ, परसेंडी, कसमंडा क्षेत्र की संबंधित 79 ग्राम पंचायतोंं में कार्य कराए जाने हैं।