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Sitapur News: शासनादेश दरकिनार, संविदाकर्मी की फर्म को 22 लाख का भुगतान

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सीतापुर। स्वच्छ भारत मिशन के तहत तैनात एक संविदा कर्मी ने अपनी ही फर्म को लगभग 22 लाख रुपये का भुगतान करा डाला। अफसर निगरानी करते रहे और शासनादेश की धज्जियां उड़तीं रहीं। गोंदलामऊ ब्लॉक में विभागीय जिम्मेदार अब पूरे मामले को रफा दफा करने में जुटे हैं। चहेतों को कृपा बरसाने वाला ये मामला भ्रष्टाचार पर शासन की जीरो टॉलरेंस की नीति को आईना दिखाता है।
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क्षेत्र पंचायत से लेकर ग्राम पंचायत तक को विकास कार्य कराने के लिए भारी भरकम बजट उपलब्ध कराया जाता है। यह बजट राज्य वित्त, 15वें वित्त के साथ ही अन्य मदों से दिया जाता है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत भी बजट ग्राम और क्षेत्र पंचायतों को उपलब्ध कराया जाता है।
शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि ग्राम्य विकास विभाग, पंचायत राज विभाग से जुड़े कर्मचारियों, संविदा और स्थाई कर्मचारियों या इनके रिश्तेदारों के नाम से पंजीकृत फर्मों को न तो कोई काम दिया जाए और न ही कोई भुगतान हो। बावजूद इसके गोंदलामऊ ब्लॉक में तैनात एक कर्मचारी ने अपनी ही फर्म को अलग-अलग तारीखों में लगभग 22 लाख रुपये का भुगतान कर दिया।
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भुगतान विभिन्न ग्राम पंचायतों के राज्य और 15वें वित्त के खाते से संविदा कर्मी की फर्म को स्थानांतरित किया गया। कभी पेयजल और स्वच्छता तो कभी फॉगिंग के नाम पर पैसा संविदाकर्मी की फर्म को दिया जाता रहा। खास बात यह है कि सभी भुगतान उक्त जारी शासनादेश के बाद किए गए हैं।
तारापुर ग्राम पंचायत से आठ सितंबर को दो पीएफएमएस के जरिए कुल एक लाख 98 हजार रुपये संविदा कर्मी की फर्म को भेजे गए। भीखपुर ग्राम पंचायत से भी नौ सितंबर को एक लाख 98 हजार 300 रुपये का भुगतान दो बार में फर्म विशेष को किया गया।
बीती 22 अगस्त को घरौली ग्राम पंचायत से संविदा कर्मी की फर्म को एक लाख 48 हजार 680 रुपये का भुगतान किया गया। जबकि इसी ग्राम पंचायत से सात सितंबर को भी एक लाख 36 हजार रुपये से अधिक का भुगतान उक्त फर्म को हुआ।
बालपुर ग्राम पंचायत से भी संविदाकर्मी की फर्म पर खूब कृपा बरसी। बीती 19 अक्तूबर को दो बार में ग्राम पंचायत ने एक लाख 12 हजार रुपये का भुगतान फर्म को किया तो 20 सितंबर को दो बार में ग्राम पंचायत नटवर से भी फर्म को लगभग एक लाख 30 हजार रुपये का भुगतान किया गया।
ये है शासनादेश
ग्राम्य विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव ने 21 मार्च 2022 को शासनादेश जारी किया था। इसमें उल्लेख था कि सरकारी कर्मचारियों और पंचायत प्रतिनिधियों की फर्म ग्राम्य विकास और पंचायत राज विभाग में काम नहीं करेंगी। इनके रिश्तेदारों जैसे पिता, बाबा, चाचा, मामा, ससुर, पुत्र, पौत्र, दामाद, भाई, भतीजा, भांजा, पत्नी का भाई, बहन आदि की फर्में भी काम नहीं करेंगी।
पूरे मामले की कराएंगे जांच, होगी रिकवरी
अब तक जानकारी नहीं थी। विस्तृत जांच कराई जाएगी। अगर संविदाकर्मी ने अपनी फर्म को भुगतान कराया है तो उसकी सेवा समाप्त की जाएगी। रिकवरी को लेकर भी नियमानुसार कार्रवाई कराई जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि जिस काम के लिए भुगतान किया गया है वे हुए भी हैं या नहीं।
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अक्षत वर्मा, सीडीओ
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