सीतापुर। दिवाली से पहले पुष्य नक्षत्र का पड़ना बेहद शुभ माना जाता है। इसे नक्षत्रों का राजा माना जाता है। इस बार पुष्य नक्षत्र चार व पांच नवंबर को पड़ रहा है। शनि और रवि का योग बाजार और खरीदारों के लिए सुख व सौभाग्य की बरसात करेगा। चार नवंबर को पुष्य नक्षत्र में चार योग का महासंयोग भी बन रहा है। नक्षत्रों के महासंयोग में भगवान भास्कर और महालक्ष्मी की आराधना विशेष फलदायी होगी। धनतेरस से पहले सोना, चांदी, वाहन और संपत्ति की खरीदारी का शुभ योग है।
आचार्य रमेश चंद्र शास्त्री के अनुसार, पुष्य नक्षत्र शनिवार व रविवार को पड़ने से इसका महत्व अधिक हो गया है। इसके अलावा बुधादित्य योग, पराक्रमी योग, साध्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग भी इसी नक्षत्र में पड़ रहे हैं।
इन शुभ संयोग पर महालक्ष्मी के साथ अपने कुलदेव और धन कुबेर की पूजा अर्चना करने से घर में महालक्ष्मी का वास होगा। पुष्य नक्षत्र को श्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है। इस नक्षत्र के अधिपति शनि और उप स्वामी बृहस्पति हैं। दोनों ग्रहदेव प्रगति व लाभ के लिए अनुकूल माने जाते हैं। नए व्यापार की शुरुआत, नई दुकान या नए प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए भी यह समय उपयुक्त माना जाता है। इस समय को खरीदारी से लेकर पॉलिसी, बैंकिंग आदि के लिए भी शुभ माना गया है।
ये करेंगे तो मिलेगी सफलता
प्रहलाद शास्त्री के अनुसार पुष्य नक्षत्र में नया कार्य प्रारंभ करने से विशेष लाभ होता है। नया व्यापार शुरू करने से व्यापारियों की उन्नति होती है। इस नक्षत्र में सोना-चांदी, वाहन इत्यादि की खरीदारी भी लाभदायक है।
ये हैं शुभ मुहूर्त
आचार्य रमेश चंद्र शास्त्री ने बताया कि पुष्य नक्षत्र चार नवंबर को सुबह 7:57 बजे के बाद से शुरू होगा, खरीदारी के लिए सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त दोपहर में 1:10 बजे के बाद मिलेगा। यह तिथि रविवार सुबह 10:30 बजे तक रहेगी। हालांकि रविवार को भी पूरे दिन खरीदारी कर सकते हैं।